Delhi: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 2 स्कूली रिक्शा चालकों को 20 साल की सख्त सजा, कोर्ट ने सुनाया यह फैसला
Delhi News: दिल्ली की एक अदालत ने 2017 में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के जघन्य अपराध में दोषी पाए गए दो स्कूली रिक्शा चालकों को 20 साल की सख्त कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बलविंदर सिंह ने यह सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि दोषियों ने मासूम बच्ची की मासूमियत और विश्वास का दुरुपयोग किया। जिसके कारण वे किसी भी रियायत के पात्र नहीं हैं।
कड़ी सजा और न्याय का संदेश
दोषियों शेख राशिद (35) और गणेश (46) को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम की धारा 6 और 10 के तहत दोषी ठहराया गया। अतिरिक्त लोक अभियोजक परेश सिसोदिया ने अदालत से अपील की थी कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा दी जाए।

फैसले की अहम बातें
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों दोषी अपने कार्यों की प्रकृति और परिणामों को समझने के लिए पर्याप्त परिपक्व थे। POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत दोनों को 20 साल की सख्त कारावास की सजा दी गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
न्यायाधीश की सख्त टिप्पणियां
न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि दोषियों ने नाबालिग के प्रति अपनी जिम्मेदारी और उसकी उम्र की संवेदनशीलता की परवाह किए बिना घृणित अपराध किया। यह विश्वासघात न केवल पीड़िता और उसके परिवार के लिए था। बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों के खिलाफ भी था। अदालत ने दोषियों को समाज के लिए गंभीर खतरा करार दिया।
विश्वास का घिनौना दुरुपयोग
न्यायालय ने कहा कि बच्ची को स्कूल लाने-ले जाने की जिम्मेदारी दोषियों को सौंपी गई थी। लेकिन प्यार और सुरक्षा देने के बजाय उन्होंने उसके और उसके परिवार के विश्वास को धोखा दिया। अदालत ने इस कृत्य को सामाजिक मूल्यों और नैतिकता का घोर उल्लंघन बताया।
पीड़िता के लिए मुआवजा
अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए 1.25 लाख रुपए का मुआवजा भी देने का आदेश दिया। यह निर्णय न केवल दोषियों के लिए एक कड़ा संदेश है। बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायिक व्यवस्था पीड़ितों के अधिकारों और पुनर्वास को लेकर प्रतिबद्ध है।
यह मामला ऐसे अपराधों के खिलाफ न्यायिक सख्ती और पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को उजागर करता है। अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि इस जघन्य अपराध के लिए दोषियों को उनकी सजा का पूरा एहसास हो और यह समाज के लिए एक नजीर बने।












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