रेलवे ओवर ब्रिज में भ्रष्टाचार का मामला आया सामने, सीएम आतिशी ने दिए जांच के निर्देश

New Delhi: नंद नगरी के पास बने नत्थू कॉलोनी आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) में हुए भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए कहा है। यह आरोप भारतीय जनता पार्टी ने लगाया है। इसके बाद मुख्यमंत्री आतिशी एक्शन में आईं और सोमवार को इसकी जांच करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि यह तथ्य चौंकाने वाला है कि 70 वर्षों से अधिक समय तक बेहतर स्थिति में रहने वाले फ्लाईओवर में काम पूरा होने के मात्र 2-3 महीनों के भीतर दरारें आनी शुरू हो गईं। आतिशी ने कहा, यह स्पष्ट संकेत है कि परियोजना के क्रियान्वयन में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ।

Atishi

सीएम आतिशी ने इस मामले में कड़ा रूख अख्तियार करते हुए चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया है कि इसकी निविदा तैयार करने, कार्य अनुबंध प्रदान करने और 2011-15 में कार्य के निष्पादन की निगरानी करने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ जांच करें। परियोजना के पूरा होने के बाद गुणवत्ता नियंत्रण कार्य करने वाली तीसरी पार्टी एजेंसी के खिलाफ जांच करें।

परियोजना के क्रियान्वयन एवं रखरखाव में लापरवाही के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। आतिशी ने पत्र में कहा है कि इस परियोजना के पूरा होने के 10 वर्षों के भीतर नंद नगरी रेलवे ओवर ब्रिज और रेलवे अंडर ब्रिज में आई बड़ी दरारों के बारे में स्थिति रिपोर्ट प्राप्त हुई है।

अधिकारियों की लापवराही और भ्रष्टाचार उजागर

इस रिपोर्ट में DTTDC और PWD Officials की ओर से घोर लापरवाही को सामने आई है, जिन्होंने इस परियोजना में भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है, जिससे न केवल दिल्ली सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि सैकड़ों लोगों की जान भी खतरे में पड़ गई है। सीएम आतिशी ने कहा, 100 करोड़ की लागत वाली परियोजना 10 साल तक भी सार्वजनिक उपयोग के लायक नहीं रह सकी। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इस परियोजना के क्रियान्वयन में शामिल अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

2019 में डेक स्लैब बदलने की हुई थी सिफारिश

आतिशी ने कहा कि मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि 2019 में, इस मामले की जांच के लिए नियुक्त एक कंसल्टेंसी फर्म ने पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही को तत्काल रोकने और डेक स्लैब को पूरी तरह से बदलने की सिफारिश की थी। यदि रिपोर्ट में बताई गई इतनी बड़ी गड़बड़ी थीं तो ठेकेदार और दोषी अधिकारियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

गौरतलब है कि इस फ्लाईओवर को लेकर इलाके के भाजपा विधायक जितेंद्र महाजन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने इस कार्य में हुए भ्रष्टाचार की सीबीआई से जांच कराने के लिए कहा है। मामला उजागर होने पर मुख्यमंत्री ने इस बारे में पीडब्ल्यूडी से रिपोर्ट मांगी थी।

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