जेडीयू ज्वाइन करने के बाद अशोक चौधरी को नीतीश कुमार ने दिया ये टास्क, बढ़ी कांग्रेस की टेंशन
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा सौंपी गई इस जिम्मेवारी को देखते हुए अशोक चौधरी ने भभुआ विधानसभा सीट को अपने नाक का सवाल बना लिया है
पटना। अशोक चौधरी कांग्रेस छोड़कर जेडीयू के साथ आ गए हैं। अब उनके हाथों में तीर है लेकिन उनके निशाने पर है पंजा। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अशोक चौधरी के जेडीयू ज्वाइन करने के साथ ही एक टास्क भी दे दिया है। जिसको अगर अशोक चौधरी पूरा कर लेते हैं तो जेडीयू में उनका कद बढ़ जाएगा। बिहार में 1 लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं । इस चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भभुआ सीट से कांग्रेस को हराने की जिम्मेवारी अशोक चौधरी को दी है।

अशोक चौधरी ने भभुआ विधानसभा सीट को अपने नाक का सवाल बना लिया है
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा सौंपी गई इस जिम्मेवारी को देखते हुए अशोक चौधरी ने भभुआ विधानसभा सीट को अपने नाक का सवाल बना लिया है वह हर हाल में इस सीट पर कांग्रेस को हारते हुए देखना चाहते हैं। अगर भभुआ सीट पर कांग्रेस हार जाती है और अशोक चौधरी अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं तो नीतीश के नजर में उनका कद और बढ़ जाएगा। ऐसा कहा जा रहा है कि यह समय अशोक चौधरी को अपनी काबिलियत दिखाने का है इसलिए वह इसके लिए मेहनत कर रहे हैं।

अशोक चौधरी बिहार कांग्रेस को परेशान करने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देंगे
अशोक चौधरी ने ऐसे वक्त में पार्टी को अलविदा कहा है जब एक ओर भभुआ में कांग्रेस प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहा है तो दूसरी ओर तकरीबन सोलह साल बाद कांग्रेस को बिहार कोटे से राज्यसभा भी जाने का मौका मिल रहा है। कांग्रेस की मौजूदा स्थिति के कारण नेतृत्व की परेशानी बढ़ी हुई है। कांग्रेस के लिए अपने सदस्यों को इस चुनाव में एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी। जानकार भी मानते हैं कि अशोक चौधरी बिहार कांग्रेस को परेशान करने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देंगे। राज्यसभा चुनाव पर उनकी खास नजर होगी। उनका प्रयास होगा कि किसी भी हाल में कांग्रेस के सामने बाधा खड़ी की जाए।

'कांग्रेस अशोक चौधरी का प्लान सफल नहीं होने देगी'
बिहार कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने आरोप लगाया है कि अशोक चौधरी पार्टी विधायकों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अशोक चौधरी ने कांग्रेस के कई जिलाध्यक्षों को तोड़ कर जदयू की सदस्यता भी दिलाई है। बावजूद पार्टी उनके मकसद को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने जो मंसूबा पाल रखा है वह मंसूबा ही रह जाएगा।












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