Beating Retreat Ceremony 2026: 4 दिनों तक चली सेरेमनी-3 सेनाओं का राष्ट्रपति को नेशनल सैल्यूट, क्या-क्या हुआ?
Beating Retreat Ceremony At Vijay Chowk: विजय चौक की रंग-बिरंगी लाइटिंग, तीनों सेनाओं के बैंड्स की मधुर धुनें और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) की मौजूदगी में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन हुआ। शाम को आयोजित बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी ने 4 दिनों तक चले गणतंत्र दिवस आयोजनों का शानदार अंत किया। इस दौरान भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंड्स ने मिलकर देशभर के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उनके साथ उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख और कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल हुए। आइए इस भव्य सेरेमनी की पूरी कहानी, खास बातें और महत्व को समझते हैं...

बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी क्या है और क्यों होती है?
बीटिंग द रिट्रीट एक 300 साल पुरानी सैन्य परंपरा है। राजा-महाराजाओं के समय में सूर्यास्त के बाद युद्ध बंद होने का ऐलान होता था। बिगुल बजते ही सैनिक हथियार नीचे रखकर बैरक लौटते थे। आज यह सेना की 'बैरक वापसी' का प्रतीक है। भारत में यह परंपरा 1950 के दशक से चली आ रही है। ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका समेत कई देशों में भी यह आयोजन होता है।
इस साल की सेरेमनी में क्या खास था?
- सीटिंग एनक्लोजर के नाम: पहली बार विजय चौक की सीटिंग जगहों को भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम दिए गए -बांसुरी, डमरू, एकतारा, तबला, वीणा, सितार, शहनाई, संतूर, सरोद, पखावज, नगाड़ा, मृदंगम। यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की पहल थी।
- लाइटिंग और सजावट: विजय चौक की सभी प्रमुख इमारतें रंग-बिरंगी लाइटिंग से जगमगाईं।
- मास बैंड का कमाल: तीनों सेनाओं और CAPF के बैंड्स ने मिलकर धुनें बजाईं -'भारत की शान', 'वंदे मातरम्', 'ड्रमर्स कॉल'। समापन 'सारे जहां से अच्छा' के साथ हुआ।
सेरेमनी का क्रम क्या था? कौन-कौन सी धुनें बजीं?
शुरुआत में सेना ने राष्ट्रपति को नेशनल सैल्यूट दिया। तिरंगा फहराया गया और राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' बजा। तीनों सेनाओं के बैंड ने 'कदम-कदम बढ़ाए जा' से शुरुआत की।
- पाइप्स एंड ड्रम्स बैंड: 'अतुल्य भारत', 'वीर सैनिक', 'मिली झुली', 'नृत्य सरिता', 'मरूनी', 'झेलम'।
- CAPF बैंड्स: 'विजय भारत', 'हथरोही', 'जय हो', 'वीर सिपाही'।
- वायुसेना बैंड: 'ब्रेव वॉरियर', 'ट्वाइलाइट', 'अलर्ट', 'फ्लाइंग स्टार'।
- नौसेना बैंड: 'नमस्ते', 'सागर पवन', 'मातृभूमि', 'तेजस्वी', 'जय भारती'।
- सेना बैंड: 'विजयी भारत', 'आरंभ है प्रचंड है', 'ऐ वतन, ऐ वतन', 'आनंद मठ', 'सुगम्य भारत', 'सितारे हिंद'।
- अंत में मास बैंड ने 'भारत की शान', 'वंदे मातरम्', 'ड्रमर्स कॉल' बजाया।
- समापन बिगुल की धुन 'सारे जहां से अच्छा' के साथ।
गणतंत्र दिवस परेड 2026 के बेस्ट अवॉर्ड्स कौन जीते?
- बेस्ट मार्चिंग टुकड़ी:
- तीनों सेनाओं में: भारतीय नौसेना
- CAPF और सहायक बलों में: दिल्ली पुलिस
बेस्ट झांकी (राज्य/केंद्रशासित प्रदेश):
- पहला: महाराष्ट्र -थीम: 'गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक'
- दूसरा: जम्मू-कश्मीर -'जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प और लोक नृत्य'
- तीसरा: केरल -'वॉटर मेट्रो और 100% डिजिटल साक्षरता'
- केंद्रीय मंत्रालयों में बेस्ट झांकी: संस्कृति मंत्रालय -'वंदे मातरम: द सोल क्राई ऑफ ए नेशन'
- विशेष पुरस्कार: CPWD को 'वंदे मातरम: 150 सालों का स्मरण' और डांस ग्रुप को 'वंदे मातरम: द इटरनल रेजोनेंस ऑफ इंडिया'।
राष्ट्रपति, PM और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण?
राष्ट्रपति मुख्य अतिथि होती हैं। सेरेमनी में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और तीनों सेनाओं के प्रमुखों की मौजूदगी से यह आयोजन देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन जाता है। यह सेना और नागरिकों के बीच एकता का भी संदेश देता है।
बीटिंग रिट्रीट का सबसे भावुक पल कौन सा होता है?
समापन में बिगुल की धुन 'सारे जहां से अच्छा' बजना। यह धुन सुनते ही पूरा विजय चौक भावुक हो उठता है। यह पल देशभक्ति और सेना के प्रति सम्मान का प्रतीक होता है।
बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी गणतंत्र दिवस का सबसे खूबसूरत और भावुक समापन है। यह न सिर्फ सेना की अनुशासन और एकता का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवंत करता है। इस साल भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम पर सीटिंग और बैंड्स की शानदार प्रस्तुति ने इसे यादगार बना दिया। आपने इस साल की सेरेमनी देखी? आपकी फेवरेट धुन कौन सी थी? कमेंट में बताएं!












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