दिल्ली की शराब नीति पर अरविंद केजरीवाल पर बरसे अन्ना हजारे, बोले- आप सत्ता के नशे में डूब गए हैं
नई दिल्ली, 31 अगस्त। दिल्ली में शराब नीति को लेकर आम आदमी पार्टी लगातार विवादों में है। भारतीय जनता पार्टी अरविंद केजीरवाल को इस नीति के चलते आड़े हाथों ले रही है तो इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कर रही है। इस बीच अरविंद केजरीवाल के गुरू अन्ना हजारे ने दिल्ली की शराब नीति पर पत्र लिखकर अरविंद केजरीवाल की जमकर क्लास लगाई है और उन्हें स्वराज आंदोलन की बातें याद दिलाई है। दिल्ली की नई शराब नीति से नाराज अन्ना हजारे ने एक पत्र लिखकर इसका विरोध किया है।

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अन्ना हजारे ने जो पत्र लिखा है उसमे कहा है कि अरविंद केजरीवाल सत्ता के नशे में चूर हैं। उन्होंने कहा कि शराब के नशे की ही तरह होता है सत्ता का नशा। अन्ना ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में शराब की दुकानों को बंद कर देना चाहिए। उन्हें याद करना चाहिए कि स्वराज पुस्तक में उन्होंने क्या लंबी-लंबी बातें की थी। लेकिन ये बातें अब केजरीवाल के आचरण में नहीं दिख रही है।
अन्ना ने पत्र में लिखा आपके मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार मैं आपको खत लिख रहा हूं, पिछले कई दिनों से राज्य की शराब नीति के बारे में खबरें आ रही हैं, यह पढ़कर दुख होता है, गांधीीजी के गांव की ओर चले, इस विचारों से प्रेरित होकर मैंने अपना पूरा जीवन गांव, समाज और देश को समर्पित किया है। पिछले 47 सालों से ग्राम विकास के लिए काम और भ्रष्टाचार के विरोध में जन आंदोलन कर रहा हूं। राजनीति में जाने से पहले आपने स्वराज नाम से एक किताब लिखी थी, इस किताब की प्रस्तावना आपने मुझसे लिखवाई थी, इस स्वराज नाम की किताब में आपने ग्राम सभा, शरीब नीति के बारे में बड़ी बड़ी बातें लिखीं थी। किबा में आपने जो लिखा है, वह आपको याद दिलाने के लिए नीचे लिख रहा हूं।
अन्ना ने केजरीवाल की किताब के अंश को पत्र में साझा किया है। उन्होंने लिखा, गांवों में शराब की लत, समस्या वर्तमान में शराब की दुकानों के लिए राजनेताओं की सिफारिश पर अधिकारियों द्वारा लाइसेंस दे दिया जाता है। अक्सर रिश्वत लेकर लाइसेंस देते हैं। शराब की दुकानों के कारण भारी समस्याएं पैदा होती हैं। लोगों का पारिवारिक जीवन तबाह हो जाता है। विडंबना ये है कि जो लोग इससे सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं, उन्हें इस बात के लिए कोई पूछता नहीं है कि क्या शराब की दुकान खुलनी चाहिए या नहीं। इन दुकानों को उनके ऊपर थोप दिया जाता है। शराब की दुकानों का कोई लाइसेंस तभी दिया जाना चाहिए जब ग्राम सभा इसकी मंजूरी दे, इस संबंध में बैठक होनी चाहिए, यहां 90 फीसदी महिलाएं जब इसके समर्थन में वोट करें तभी लाइसेंस देना चाहिए, नहीं तो दुकानों का लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए।
अन्ना ने लिखा राजनीति में जाकर मुख्यमंत्री बनने की वजह से आप आदर्श विचारधारा को भूल गए। इसी लिए आपकी सरकार ने नई शराब नीति बनाई। ऐसा लगता है कि इस नीति से शराब की बिक्री और शराब पीने को बढ़ावा मिलेगा। गली-गली में शराब की दुकानें खुलवाई जा सकती है, इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है, यह जनता के हित में नहीं है, फिर भी आपने यह फैसला लिया, इससे ऐसा लगता है कि जिस प्रकार शराब का नशा होता है, उस प्रकार सत्ता का भी नशा होता है, आप भी सत्ता के नशे में डूब गए हैं, ऐसा लग रहा है।












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