अलका लांबा ने सही बोला था! क्यों दिल्ली में I.N.D.I.A. को टाटा कर सकती है कांग्रेस?

विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस) को लेकर जो आशंकाएं बार-बार जताई जाती रही हैं, वह दिल्ली में एकबार फिर सामने आ रही है। यह गठबंधन बना ही इसलिए है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में एक सीट पर इंडिया ब्लॉक के एक उम्मीदवार को उतारकर बीजेपी को चुनौती दी जाए। लेकिन, कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली की सभी सातों सीटों पर अपनी संगठनात्मक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

पिछले महीने दिल्ली कांग्रेस की नेता अलका लांबा ने पार्टी की एक बड़ी बैठक से निकलने के बाद यही बात कही थी, जिसपर इंडिया ब्लॉक में बवाल मच गया था। कांग्रेस ने जिस तरह से पार्टी के पूर्व विधायकों और शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे नेताओं को सातों लोकसभा सीटों का संयोजक बनाया है, उससे यही संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी अपनी ओर से सभी सीटों के लिए पूरी तरह से तैयार रहना चाहती है।

delhi congress and india

शीला दीक्षित के भरोसेमंदों को आगे बढ़ा रही है कांग्रेस
गौरतलब है कि पार्टी ने पहले अरविंदर सिंह लवली जैसे नेता को प्रदेश का कमान दिया और अब नरेंद्र नाथ और हारून युसूफ जैसे पूर्व मंत्रियों और जय किशन, वीर सिंह धींगा, सुभाष चोपड़ा, मुकेश शर्मा और विजय लोचव जैसे पार्टी के पूर्व विधायकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर अपना इरादा साफ कर दिया है।

पार्टी ने दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए जमीनी स्तर पर संगठन में जान फूंकने की की कोशिश की है। हर विधानसभा क्षेत्रों में 9 सदस्यीय टीम खड़ी कर रही है। दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से लगभग हर में करीब 10 विधानसभा सीटें आती हैं।

2024 के लिए संगठनात्मक तैयारियां कर रहे हैं- लवली
अभी जो जमीनी स्तर पर संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया जा रहा है, यह काम अक्टूबर के अंत तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। दिल्ली के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने ईटी को बताया है, 'हमने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर हमारी राय से हमारे वरिष्ठ नेताओं को अवगत करा दिया है। अब हम 2024 के संसदीय चुनावों के लिए संगठनात्मक तैयारियां कर रहे हैं।'

इंडिया ब्लॉक में तालमेल हो पाने में क्यों है मुश्किल?
दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन का विरोध दिल्ली कांग्रेस के नेता तो करते ही रहे हैं। दरअसल, अगर हम 2019 के लोकसभा चुनावों और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणामों को देखें तो इसमें इतना विरोधाभास है कि इंडिया ब्लॉक के मंसूबे के मुताबिक सीटों का बंटवारा हो पाना बहुत मुश्किल है।

मसलन, 2019 के लोकसभा चुनावों में जहां दिल्ली की सात में से पांच सीटों पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी, वहीं राज्य में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी सिर्फ दो सीटों पर ही दूसरे नंबर पर जगह बना सकी थी। जबकि, सातों सीटें 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद लगातार दूसरी बार भी बीजेपी ने जीत ली थी।

कांग्रेस जिन 5 सीटों पर दूसरे नंबर पर आई थी, उनमें चांदनी चौक, पूर्वी दिल्ली, नई दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और उत्तर-पूर्वी दिल्ली शामिल है। वहीं 2020 के विधानसभा चुनावों में 70 में से 62 सीटें आम आदमी पार्टी के खाते मे गई थी और कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी थी।

दिल्ली में I.N.D.I.A. को टाटा कर सकती है कांग्रेस?
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा है, 'आम आदमी पार्टी अस्थिर पार्टी है। हम नहीं जानते कि क्या कोई गठबंधन होगा। हमारी प्रदेश इकाई ऐसा नहीं चाहती। इसलिए हम सभी सातों सीटों के लिए तैयारियां कर रहे हैं।'

गौरतलब है कि दिल्ली कांग्रेस की नेता अलका लांबा ने पिछले महीने पार्टी की एक मैराथन बैठक के बाद जो बयान दिया था, उसपर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया जताई थी और कांग्रेस के बड़े नेताओं को अलका के बयानों से कन्नी तक काटनी पड़ गई थी।

तब अलका लांबा ने कहा था कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल जैसे नेताओं की मौजूदगी में "बिल्कुल आदेश हुआ है कि हमें सातों सीटों पर मजबूत संगठन के साथ हर नेता को आज से, अभी से निकलना है....सात महीनें, सात सीटें हैं....ये बात हुई कि जिसकी दिल्ली उसका देश होता है....ये दिल्ली का इतिहास बताता है....इसलिए कहा गया कि सातों पर तैयारी रखनी है..."

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