सरकार से सवाल पूछने वालों की जुबान बंद...महुआ मोइत्रा के निष्कासन पर आम आदमी पार्टी ने नाराज होकर बोली ये बात
AAP reaction on Mahua Moitra's expulsion: लोकसभा से सांसद महुआ मोइत्रा को निष्कासित कर दिया गया है। कैश फॉर क्वेरी मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को निष्काषित करते हुए लोकसभा स्पीकर ने कहा कि महुआ का अचारण अनैतिक है। सांसद महुआ मोइत्रा की लोकसभा से सदस्यता छिने जाने पर विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार पर जमकर हमले कर रही है। शनिवार को महुआ मोइत्रा के लोकसभा से निष्कासन पर दिल्ली सरकार के मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा केंद्र सरकार केवल सकारात्मक बातें सुनना चाहती है, अगर को सकारात्मक बातें बोलता है तो वो अपना बोलना जारी रख सकता है लेकिन अगर कोई सरकार के खिलाफ बोलता है तो उसके खिलाफ बोलता है तो कार्रवाई होगी।
सौरभ भारद्वाज ने कहा- ये बात जग जाहिर है जो भी नेता मुखर होकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार के सामने अपनी बात रखते थे, जोर से अपनी बात कहते थे, जिनकी बात करोड़ों लोग सोशल मीडिया पर सुनते थे, उन लोगों से जुड़े जितने लोग भी है उन पर केंद्र सरकार हमलावर है।
आप मंत्री सौरभ ने दावा किया कि " संजय सिंह आज जेल में है, महुआ मित्रा आज संसद से बाहर हैं। तमाम ऐसे एक्टविस्ट, तमाम ऐसे सिविल लिबर्टी एक्टिविस्ट, जो केंद्र सरकार से सवाल पूछते थे उनको अलग-अलग छोटे-बड़े मुकद्दमों के तहत जेल में डाल दिया गया है। तमाम वो संस्थाएं जो सरकार के अंदर की पोल खोला करती थीं, उनकी फंडिंग को रोकने के लिए नए-नए कानून और नए-नए हथकंडे अपनाकर उनकी फंडिंग रोक दी गई है।"
सौरभ भारद्वाज बोले "कहा जा सकता है कि सरकार सिर्फ अपनी बड़ाई सुनना चाहती है। सरकार की बड़ाई कीजिए, सरकार के पक्ष में बोलिए तो आपको बोलने दिया जाएगा। सरकार से सवाल पूछने वालों की जुबान बंद करने वाले सारे हथकंडे सरकार अपना रही है मुझे लगता है कि अगर कुछ समय बाद लोग सरकार से सवाल पूछना बंद कर देंगे तो सबसे बड़ा नुकसान देश की जनता को होगा। क्योंकि जनता तो खुद नहीं पूछेगी सवाल, जनता इन्हीं माध्यमों से सवाल पूछे जाते हैं। ये कहें कि सवाल कहीं से आए थे।"
उन्होंने कहा "मैं अगर सदन में सवाल पूछूगा तो जाहिर है वो मेरी पर्सनल नॉलेज नहीं हो सकती, वो संभव ही नहीं है।आपको कोई ना कोई जनता कहेगी कि ये जनहित का सवाल है, इसे आप पूछिए। यहां गड़बड़ी हो रही है आप सवाल पूछिए। हमारे सवाल सोर्स होते हैं अलग-अलग माध्यमों के। अगर सवाल किसी सोर्स से आता है और पूछा जाता है और उसे गलत कहा जाता है तो मैं कहूंगा कि ये परिभाषा ही गलत है।"












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