आम आदमी पार्टी ने शुरू किया 'अपनी डिग्री दिखाओ' अभियान, भाजपा नेताओं को दिया चैलेंज
Apni Degree Dikhao Abhiyan: आम आदमी पार्टी ने पीएम मोदी की डिग्री दिखाने का मुद्दा जोर शोर से उठा रखा है। इसी क्रम में दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना ने अपनी डिग्री दिखाओ अभियान शुरू कर दिया है।

Apni Degree Dikhao Campaign: प्रधानमंत्री की डिग्री दिखाने का मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को अब अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहती है। एक कदम और आगे बढ़कर अब आम आदमी पार्टी ने ''अपनी डिग्री दिखाओ" अभियान शुरू किया है और भाजपा नेताओं को भी ऐसा करने की चुनौती दी है। आप विधायक और दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना (Atishi Marlena) ने अभियान की घोषणा गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने के एक हफ्ते बाद की है।
आतिशी ने आज दिल्ली में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हम आज एक अभियान शुरू कर रहे हैं। आपके नेता आपको हर रोज अपनी डिग्री दिखाएंगे। मेरे पास दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री और ऑक्सफोर्ड से दो मास्टर डिग्री है। ये सभी असली हैं। उन्होंने कहा कि मैं सभी नेताओं से, खासकर भाजपा नेताओं से अपनी डिग्री दिखाने के लिए कहना चाहती हूं। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत आप नेता अपनी डिग्री दिखाएंगे।
बता दें कि हाल ही में उच्च न्यायालय के आदेश ने पीएम मोदी की शिक्षा को उजागर करने वाले आप के आक्रामक अभियान पर विवाद को जोड़ा। पार्टी ने कई शहरों में पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए पोस्टर लगाए थे। 2016 में, केजरीवाल के सूचना के अधिकार (आरटीआई) के अनुरोध पर पीएम मोदी की शिक्षा के विवरण के लिए, तत्कालीन केंद्रीय सूचना आयोग एम श्रीधर आचार्युलु ने प्रधान मंत्री कार्यालय, गुजरात विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय को पीएम मोदी के स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री की जानकारी देने के लिए कहा था।
इसके बाद गुजरात विश्वविद्यालय ने पीएम मोदी की डिग्री को तुरंत अपनी वेबसाइट पर डाल दिया, लेकिन साथ ही सूचना आयोग के आदेश को सैद्धांतिक तौर पर चुनौती दी। सत्तारूढ़ भाजपा ने पीएम मोदी की डिग्रियों की प्रतियां साझा कीं जिसमें दिखाया गया कि पीएम मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए और गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए की है। वहीं केजरीवाल ने दावा किया कि दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां थीं।
वहीं गुजरात उच्च न्यायालय में सरकार के वकील तुषार मेहता ने कहा कि दोनों विश्वविद्यालयों को सूचना का खुलासा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। शीर्ष सरकारी वकील ने कहा कि लोकतंत्र में, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि पद पर आसीन व्यक्ति डॉक्टरेट है या अनपढ़। साथ ही, इस मुद्दे में कोई जनहित शामिल नहीं है। यहां तक कि उनकी निजता भी प्रभावित होती है। जोर देकर कहा कि पीएम मोदी की डिग्रियों की जानकारी का उनकी भूमिका पर कोई असर नहीं पड़ा है।












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