दिल्ली में एक अस्पताल के 25 फीसदी फुल वैक्सीनेट डॉक्टर कोरोना संक्रमित, लेकिन एक भी नहीं हुआ गंभीर- स्टडी
नई दिल्ली, अगस्त 31। राजधानी दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल के हेल्थ वर्करों पर की गई स्टडी में कोरोना वैक्सीन के प्रभाव के बेहतर नतीजे सामने आए हैं। दरअसल, मैक्स ग्रुप के 600 स्वास्थ्यकर्मियों पर की गई स्टडी में सामने आया है कि वैक्सीन लेने के बाद इनमें 25 फीसदी को कोरोना हुआ, लेकिन उनमें से एक को भी अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी। आपको बता दें कि इसी संक्रमण पर पहले भी कई स्टडी की गई हैं, लेकिन इतना अधिक प्रतिशत स्टडी में पहली बार आया है।
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मैक्स अस्पतालों के डॉक्टरों पर हुई स्टडी
द हिंदू की खबर के मुताबिक, इस अध्ययन में दिल्ली और गुरुग्राम के मैक्स ग्रुप के अस्पतालों के हेल्थ वर्करों को शामिल किया गया। इस स्टडी का नेतृत्व CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के वैज्ञानिकों ने किया था। इस स्टडी के नतीजे हालांकि अभी प्रकाशित नहीं हुए हैं और इसके नतीजों की अभी समीक्षा की जा रही है। स्टडी में शामिल हुए 600 डॉक्टरों में पहली और दूसरी खुराक के बीच का समय अलग-अलग था, लेकिन पहली खुराक के 42 दिनों के भीतर 482 को दूसरी खुराक मिली।
इस स्टडी को लीड करने वाले IGIB के वैज्ञानिक शांतनु सेनगुप्ता ने बताया है कि जितने भी कुल स्वास्थ्यकर्मियों पर स्टडी की गई है, उनमें से 25 फीसदी के अंदर फिर से संक्रमण मिला है। हालांकि बाकि डॉक्टरों को भी टेस्ट कराना चाहिए, क्योंकि अब वायरस के नए-नए वेरिएंट आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि जो स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित मिले हैं, उनके अंदर एंटीबॉडी का स्तर ज्यादा नहीं था। उन्होंने कहा कि एक वास्तविक एंटीबॉडी फेल्योर उसे माना जाता है, जहां व्यक्ति को वैक्सीन की दोनों डोज लगने के कम से कम दो सप्ताह बाद फिर से कोरोना संक्रमण हो जाए।












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