हरीश रावत के दांव पर सतपाल महाराज का वार, मुश्किल में उत्तराखंड सरकार

घटनाक्रम को देखें तो दो साल पूरा होते होते बहुगुणा की विदाई हुई और हरीश रावत ने कमान संभाली, लेकिन हरीश रावत के दिन भी अब पूरे होते दिखाई दे रहे है। बहुगुणा के ख़िलाफ़ मोर्चाबंदी करने वाले हरीश रावत को उत्तराखंड कांग्रेस के तीसरे कद्दावर नेता सतपाल महाराज ने झटका दे दिया है और महज दो महीने के भीतर ही उनकी सरकार को हिला कर रख दिया है।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा का हाथ थामने वाले सतपाल महाराज ने एक तीर से कई निशाने साधने का दांव चला है। उनके पार्टी छोड़ते ही सरकार पर अब संकट के बादल बनकर मंडरा रहे हैं। जैसा कि सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है अगर उनके साथ छह विधायक भी चले गए तो सरकार गिरनी तय है।
माना जा रहा है कि अपने इस कदम उन्होंने हरीश रावत पर निशाना साधा है,लेकिन सवाल ये कि क्या हरीश रावत इतने कच्चे खिलाड़ी है कि इतनी आसानी से अपनी सरकार गिरने देंगे। उन्हें ये बात उस वक्त याद नहीं आई जब वो सतपाल महाराज को भड़काने और उकसाने वाले बयान दे रहे थे।
भाजपा में शामिल हुए सतपाल महाराज के लिए भी चुनौती कम नहीं है। वो पौड़ी गढ़वाल से सांसद रहे है, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद अब उनके सामने अपनी सीट बदलने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है, क्योंकि इस सीट पर बीजेपी से बीसी खंडूड़ी मैदान में हैं। खंडूड़ी की छवि और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा उन्हें उस सीट से हटाने का रिक्स नहीं लेंगी ऐसे में सतपाल महाराज को अपने लिए कोई दूसरी सीट चुननी होगी। हलांकि कहा जा रहा है क्योंकि भाजपा ने उत्तराखंड में पांचों सीटों ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है ऐसे में सतपाल महाराज भाजपा के टिकट पर उत्तराखण्ड से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
गौरतलब है कि सतपाल महाराज कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए हैं। शुक्रवार को पौड़ी से सांसद सतपाल महाराज के इस कदम से कांग्रेस को गहरा झटका लगा है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सतपाल महाराज ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह व पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।












Click it and Unblock the Notifications