Kargil Vijay Diwas Gorakhpur : गोरखपुर को नाज है अपने लाल शिव सिंह छेत्री पर,महज 23 साल में हुए थे शहीद

आज यानी 26 जुलाई को देशभर में कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है। आज के ही दिन वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ दिया और 'ऑपरेशन विजय' के हिस्से के रूप में टाइगर हिल और अन्य चौकियों पर कब्जा कर लि

Kargil Vijay Diwas 2022: आज यानी 26 जुलाई को देशभर में कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है। आज के ही दिन वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ दिया और 'ऑपरेशन विजय' के हिस्से के रूप में टाइगर हिल और अन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया। इसी युद्ध में गोरखपुर के लाल शिव सिंह छेत्री ने महज 23 साल की उम्र में अपने प्राणों को देश के लिए न्योछावर कर दिया था। आज गोरखपुर सहित पूरे देश को शिव पर नाज है।इस अवसर पर उनकी कहानी उनके पिता की जुबानी सुनते हैं।

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बेटे पर है गर्व

कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले शिव सिंह छेत्री का आवास गोरखपुर के बिछिया में स्थित है।इनके पिता दो और बेटा के साथ यहां रहते हैं। पिता गोपाल सिंह को आज भी अपने बेटे पर नाज है। वह कहते हैं कि असमय बेटे का जाना किसी भी पिता के लिए पीड़ा दायी होता है,लेकिन अपने देश की रक्षा के लिए शहीद होने पर गर्व है । पूरा शहर मुझे मेरे बेटे के नाम से जानता है, एक माता-पिता के लिए इससे अनमोल उपलब्धि कुछ नहीं हो सकती। मैं तो ऊपर वाले से दुआ करता हूं। जब भी मुझे जीवन मिले, शिव का पिता बनने का सौभाग्य मिले।

बचपन से ही सेना में जाने की थी इच्छा
शिव सिंह छेत्री का बचपन बिछिया में बीता था। 10वीं तक की पढ़ाई नेहरू इंटर कॉलेज से करने के बाद इंटरमीडिएट के लिए उन्होंने एमपी इंटर कॉलेज को चुना। अपने बैच के सबसे होनहार छात्र शिव सिंह छेत्री शिक्षकों और दोस्तों के प्रिय थे। पिता नेे बताया कि बचपन से सेना में जाने की इच्छा रखने वाले शिव सिंह छेत्री ने जब 11वीं में दाखिला लिया तो इस दौरान उनकी पोस्टिंग बनारस में हो गई। शिव भी पढ़ाई छोड़कर उनके पास बनारस चले गए थे।फिर सेना में जाने का सिलसिला शुरु हुआ।

23 साल में हुए शहीद शिव सिंह छेत्री ऊर्फ दीपू महज 23 साल में ही देश के लिए शहीद हो गए थे। उनके पिता बताते हैं कि आखिरी बार आशीर्वाद लेकर ड्यूटी पर जाते बेटे का चेहरा उन्हें आज भी याद है। शिव सिंह छेत्री को 14 अगस्त 1999 को कुपवाड़ा सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान गोली लगी थी। 22 अगस्त को सेना के हॉस्पिटल में उनकी मौत हुई।दीपू तो शहरवासियों को छोड़कर जा चुके है पर यहां के लोगों के दिलों में वो हमेश जिंदा रहेंगे।पूरे शहर को अपने लाल पर नाज है।

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