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चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह संपन्न, 900 छात्रों को डिग्री और 40 टॉपर को मिले मेडल

Satna News: मध्य प्रदेश के चित्रकूट स्थित महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह विवेकानंद सभागार में संपन्न हुआ।

जिसमे 68 शोध कर्ताओं को पीएचडी उपाधि और 832 स्नातक परास्नातक छात्र-छात्राओं को डिग्रीप्रदान की गई।इसके अलावा 40 टॉपर छात्र छात्राओं को मैडल प्रदान किए गए।

Chitrakoot Dishant Ceremony,

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि आनंदम धाम पीठाधीश्वर सदगुरुदेव रितेश्वर जी महाराज रहे। कुशा भाऊ ठाकरे पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो बलदेव भाई शर्मा विशिष्ट अतिथि रहें। और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति विश्व विद्यालय अमरकंटक के कुलपति प्रो प्रकाश मणि त्रिपाठी द्वारा दीक्षांत उद्वोधन दिया गया।

ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो भरत मिश्रा द्वारा कार्यक्रम की अध्यक्षता की गई। कुलसचिव नीरजा नामदेव ने प्रगति प्रतिवेदन और स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। सत्र संचालन उप कुलसचिव अकादमी डॉ कुसुम कुमारी सिंह द्वारा किया गया।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि बृंदावन आनंदम धाम के पीठाधीश्वर सदगुरुदेव रितेश्वर महाराज द्वारा मीडिया से बात करते हुए कहा गया कि मुझे लगता है कि नानाजी देशमुख पहले ऐसे चिंतक थे जो ग्रामों के द्वारा भारत के पूर्ण निर्माण की चिंता करते थे।

जहां दूसरी तरफ औद्योगिक क्रांति पर नाना जी को पता था कि भारत ग्राम और कृषि प्रधान देश है। हम जिस गांव वंश की रक्षा की बात करते हैं, वह भी इसी से हो सकती है। नानाजी देशमुख बड़े ही दूर दृष्टा ऋषि है। भारत की मांगे तो अनेक है, पर रास्ता एक है ग्रामोदय का विकास।

ग्रामोदय विश्वविद्यालय के ऊपर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारों की बाध्यताएं होती हैं, संविधान की बाध्यताएं होती हैं। नानाजी जिस दृष्टि से ग्रामोदय विश्वविद्यालय का निर्माण किए अब परिकल्पना पूरी होगी। जो लोग सत्ता और शासन में है, और आज भारतीय जिस प्रकार से जागृत हो गए हैं सनातन संस्कृति के लिए। हमें विश्वास है आने वाले समय में अन्य बाधाएं भी दूर होगी, भारत का विकास होगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर परिवर्तन लाकर यह हमें भरोसा दिलाया है कि हमारी जो सनातनी विद्या है और आज के समय का आधुनिक विज्ञान, इन दोनों को मिलाकर एक फ्यूजन विद्या का निर्माण होगा। उन्होंने बताया कि विश्व के सबसे बड़े सनातनी विश्वविद्यालय का निर्माण भी इसी पद्धति पर कराया जाएगा।

महाराज ने कहा कि नानाजी देशमुख द्वारा परिकल्पित देश के पहले ग्रामोदय विश्वविद्यालय से उपाधि लेकर जाने वाले विद्यार्थियों को भारत के विकास और मानवता के विकास के लिए काम करना चाहिए।

इससे तनाव रहित जीवन और बसुधैव कुटुंबकम के नारे को यथार्थ का धरातल मिल सकेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सशक्त भारत के निर्माण के लिए विश्वविद्यालय से उपाधि प्राप्त करने विद्यार्थी नाना जी के स्वप्न को साकार करने के लिए सार्थक कदम उठाएंगे।

11वें दीक्षांत समारोह में परिश्रम के बाद उपाधि और गोल्ड मेडल प्राप्त होने पर शोधकर्ताओं और छात्रों द्वारा सफलता के बाद प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नानाजी देशमुख के द्वारा शुरू किए गए ग्रामोदय की परिकल्पना को अनेक माध्यमों से लगातार आगे बढ़ना और उपाधि के मिलने के बाद अपनी एकेडमिक क्षमता को निखारते हुए हर तपते के लोगों तक पहुंच कर उन्हें लाभ पहुंचाना और चिंता करते हुए ग्राम और भारत के निर्माण में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के प्रयास को आगे बढ़ाने में कार्य करना होगा।

यह उपाधि हम सभी को कड़ी मेहनत और लगन के बाद मिली है, हम अपने जीवन में बदलाव के साथ साथ सामाजिक जिम्मेदारियों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए काम करेंगे। नानाजी देशमुख हम सभी के लिए सदा ही प्रेरणा स्रोत रहेंगे।

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