Satpura Tiger Reserve पहुंचे करीब 15 हजार किलो वजनी 4 हाथी, 1600 किमी दूर कर्नाटक से लाने में लगे 4 दिन
एमपी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व कर्नाटक से चार हाथी पहुंच गए हैं। लगभग 1600 किमी का सफ़र करने में हाथियों को लगभग 62 घंटे का वक्त लगा। ट्रकों के माध्यम से काफिले के साथ इन्हें लाया गया।

एमपी के कूनों में नामीबिया से चीते आए तो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हमारे यहां से ही कर्नाटक के हाथी पहुंच गए। इंतजार की वो घड़ी उस वक्त ख़त्म हो गई जब चार हाथियों को मटकुली के नजदीक ट्रकों से उतारा गया। ये हाथी यहां अपने नाम से पहचाने जाएंगे और इन्हें एक महीने तक रखा जाएगा। जिनकी देखरेख के लिए कर्नाटक से महावत भी आए हैं। करीब सौ किमी के लंबे सफ़र से इन्हें लाने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट काफी मशक्कत करना पड़ी।

मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में कर्नाटक से चार हाथी लाने का फैसला लिया गया था। जिसका इंतजार ख़त्म हो गया। दो मेल और दो फीमेल हाथियों की खेप ट्रकों के माध्यम से एमपी पहुंची। गजा, पूजा, मारिशा और कृष्णा नाम के ये हाथी काफी हष्ट पुष्ट है। इनका काफिला काफी इंतजामों के साथ कर्नाटक से 29 नवम्बर को रवाना हुआ था।सड़क मार्ग से सफ़र 16 सौ किमी का था, लेकिन इनकी सेहत का ख्याल रखते हुए एमपी पहुँचने में 62 घंटे लग गए। इनके साथ महावत भी आए है, जो महीने भर इनकी देखरेख करेंगे। स्टेट फॉरेस्ट की 32 सदस्यीय टीम इनको लेकर पहुंची है।
बताया गया कि हाथियों को अजनाढ़ाना कैंप में रखा गया हैं। मटकुली के पास परासपानी बेरिया में इन्हें उतारा गया था। जिन ट्रकों में ये हाथी सवार थे उसके आगे पीछे पॉयलेटिंग होती रही। सफ़र के दौरान आम यात्रियों की तरह इनका हर इंतजाम था। जंगल के रास्ते, नेशनल पार्क कोर क्षेत्र में हाथियों के आराम करने का भी इंतजाम रहा। जहां जहां ठहराव हुआ, वहां खान-पान से लेकर हर तरह की गतिविधि रिकॉर्ड की गई। बीच रास्ते में मैसूर, बेंगलूरु, नागपुर, छिंदवाड़ा होते हुए हाथी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व पहुंचे। अब इन्हें यहां एक हिसाब से प्रशिक्षित भी किया जाएगा।सफ़र के दौरान और अब बाद में भी डॉक्टरों की टीम इनका स्वास्थ्य परीक्षण भी कर रही है। फिलहाल सभी पूरी तरह स्वस्थ हैं।












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