क्या ठगे गए हसदेव अरण्य के आदिवासी ? छत्तीसगढ़ सरकार ने नही कराई फर्जी ग्राम सभाओं की जांच
छत्तीसगढ़ सरकार ने नही कराई फर्जी ग्राम सभाओं पर जांच ।
रायपुर ,10 फरवरी। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार सरगुजा के हंसदेव अरण्य क्षेत्र के आदिवासियों को न्याय दिलाने में अब तक विफल साबित हुई है। हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीणों को हसदेव अरण्य क्षेत्र में फर्जी ग्राम सभा कराये जाने से शिकायतों पर जांच कराये जाने का आश्वासन दिया था,लेकिन सारे ज्ञापन ,शिकायतें यथास्थिति हैं।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों का यह आरोप है कि फर्जी ग्राम सभाओं के प्रस्तावों को आधार बनाकर एक निजी कंपनी ने परसा कोयला खदान के लिए केंद्र सरकार से परमिशन हासिल कर ली है।इस सम्बंध में अपनी शिकायत लेकर बीते साल अक्टूबर के महीने में सरगुजा संभाग के हजारों ग्रामीणों ने पदयात्रा करते हुए राजधानी कूच किया था। ग्रामीणों ने रायपुर में राज्यपाल अनुसुइया उईके और सीएम बघेल से मुलाकात करके अपनी बातें रखी थीं। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से फर्जी ग्रामसभा कराये जानें की शिकायतों की जांच कराने का आश्वसन दिया था,लेकिन अब तक की स्थिति में नतीजे नही मिल पाए हैं।
यह भी पढ़ें छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन के गठन का निर्णय,पांच सालों मे 15 लाख को रोजगार देने का लक्ष्य
हालांकि राज्यपाल अनुसूईया उइके ने ग्रामीणों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मुख्य सचिव अमिताभ जैन को चिट्टी लिखकर फर्जी ग्राम सभा की शिकायतों पर जांच के लिए भी निर्देश दिये थे,लेकिन अभी तक कोई जांच शुरू नहीं हो सकी है। सरगुजा का परसा कोल ब्लॉक का आवंटन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के पास है। हर साल पांच लाख टन की क्षमता रखने वाली परसा खदान को चलाने करने का कांट्रेक्ट अडानी ग्रुप के पास है। राजस्थान की गहलोद सरकार और अडानी समूह छत्तीसगढ़ सरकार पर बिजली संकट का हवाला देते हुए खनन को लेकर दबाव बना रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पारस कोल ब्लॉक परियोजना से इलाके में 5 गांव में विस्थापन का खतरा बढ़ गया है,जबकि क्षेत्र में 841 हेक्टेयर क्षेत्र का जंगल उजड़ने का भय बना हुआ है।
यह भी पढ़ें भूपेश बघेल सरकार ने की धान की बम्पर खरीदी,तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड
परसा कोल ब्लॉक में खनन प्रोजेक्ट के लिए कलेक्टर की एनओसी में ग्रामसभा के प्रस्ताव बताए गए थे। ग्रामीण इन ग्राम सभाओं को फर्जी करार दे रहे हैं। सरगुजा संभाग में आदिवासियों के हक की लम्बी लड़ाई लड़ने वाले सामजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला कहते हैं कि परसा कोल ब्लॉक को लेकर अनुमति फर्जी ग्राम सभा के प्रस्ताव को आधार बनाकर हासिल की गई थी। अक्टूबर में ही केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने परसा कोल ब्लॉक को आखरी मंजूरी दे दी थी।लेकिन इस सम्बंध में अंतिम आदेश छत्तीसगढ़ सरकार के पास लंबित है। शुक्ला ने कहा कि जिस दिन बघेल सरकार इस संबंध में आदेश जारी कर देगी ,खनन का काम शुरू हो जाएगा।
ग्रामीण आदिवासियों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री राज्यपाल से लेकर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक से पूरे मामले पर हस्तक्षेप करने की मांग को लेकर मुलाकात की थी , लेकिन कोई हल ना निकलने से अब वह एक बड़े आंदोलन की तैयारी में है। परसा कोल ब्लॉक से प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वह खनन के सख्त खिलाफ हैं, क्योंकि उससे उनके घर उजड़ जाएंगे और पर्यावरण को काफी नुकसान होगा।












Click it and Unblock the Notifications