Naxal Encounter: नक्सलियों के खात्मे में क्या दिक्कतें आती हैं? CRPF कोबरा कमांडो ने बताई इनसाइड स्टोरी
Naxal Encounter Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा जिले की सीमा में अबूझमाड के थुलथुली गांव में 4 अक्टूबर 2024 को सुरक्षाबलों ने 30 नक्सलियों को ढेर कर दिया। मारे गए नक्सलियों के ठिकाने से भारी मात्रा में AK-47 जैसे ऑटोमेटिक हथियार भी बरामद किए गए हैं। शुक्रवार सुबह शुरू हुआ विशेष ऑपरेशन रात तक जारी रहा।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ साल 2024 में सुरक्षा बलों की यह सबसे बड़ी कामयाबी है, मगर छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या वर्षों पुरानी है। हर साल सुरक्षाबल नक्सलियों को ढूंढ-ढूंढकर मारते रहते हैं और नक्सली भी सुरक्षाबलों पर हमला करने से बाज नहीं आते हैं।
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छत्तीसगढ़ और झारखंड में आखिर नक्सलवादियों का खात्मा करना आसान क्यों नहीं? सुरक्षाबलों के सामने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में कौनसी दिक्कतें आती हैं? इन सवालों के जवाब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के उस कोबरा कमांडो ने दिए हैं, जिन्होंने नक्सलवादियों के खिलाफ बतौर कंपनी कमांडर कई ऑपरेशनों को लीड किया।
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में सीआरपीएफ के अफसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वे साल 2009 से लेकर 2012 तक छत्तीसगढ़ के बस्तर व झारखंड में तैनात रहे हैं। इनका चार सालों में नक्सलियों से कई बार आमना-सामना हुआ है। बड़ी संख्या में नक्सली ढेर भी किए हैं। इसी बहादुरी के चलते इन्हें वीरता पुलिस पदक से नवाजा गया।
सुरक्षाबलों के सामने चुनौती
सीआरपीएफ के ये अफसर बताते हैं कि उन्होंने छत्तीसगढ़-झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जाने वाले ऑपरेशनों में सीआरपीएफ, राज्य पुलिस जवान, डीआरजी और एसटीएफ जवानों के आने वाली चुनौतियों को करीब से देखा और समझा है, जो इस प्रकार से हैं।
1. जल, जंगल और जमीन: नक्सलियों की सबसे बड़ी ताकत वहां की भौगोलिग स्थित के कारण है, जिसमें जल, जंगल और जमीन शामिल है। मतलब कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिलों में हजारों वर्ग किलोमीटर में घने जंगल है। जंगल के चप्पे-चप्पे से नक्सली वाकिफ होते हैं।
इन जंगलों में रास्ते खतरे से खाली नहीं है। ऐसे-ऐसे नदी-नाले हैं, जिन्हें पार करके नक्सलियों के ठिकानों तक पहुंच पाना आसान नहीं है। रही-सही कसर दुर्गम पहाड़ियां पूरी कर देती हैं।
2. मौसम: नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने वाले सुरक्षाबलों को मौसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नक्सल प्रभावित इलाकों में जनवरी माह में भी भयंकर गर्मी पड़ती है। अधिकतम तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जाता है। नक्सली तो इसी मौसम में जन्मे और पले-बढ़े हैं, इसलिए उनके लिए यह मौसम अनुकूल रहता है।
3. बुनियादा ढांचा: नक्सली खुले इलाकों की बजाय घने जंगलों में अंदर रहते हैं। वहीं, पर उनको सुरक्षाबलों पर हमलों की ट्रेनिंग दी जाती है। नक्सलियों में ऐसी जगहों पर ठिकाने बना रखे हैं, जहां न तो सड़कें जाती हैं ना ही आधुनिक जमाने के कोई संचार के साधन काम करते हैं। मोबाइल टावरों की रेंज ही नहीं पहुंच पाती है।
4.गुरिल्ला युद्ध: नक्सलियों की सबसे बड़ी ताकत उनका गुरिल्ला युद्ध में दक्ष होना है। नक्सली सुरक्षाबलों से कभी भी आमने-सामने नहीं लड़ते बल्कि ये घात लगातर हमला करते हैं। पुरुष नक्सली ही नहीं बल्कि महिला नक्सलियों को भी गुरिल्ला युद्ध में महारत हासिल रहती है।
5. स्थानीय सपोर्ट: नक्सलियों को स्थानीय ग्रामीणों का सपोर्ट रहता है। इसी वजह से सुरक्षाबलों की उन तक पहुंच आसान नहीं होती है। कई बार ऐसा हुआ है कि सुरक्षाबलों के विशेष अभियानों की सूचना पहले नक्सलियों तक पहुंच गई थीं।
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