Korba News: पति के साथ नहीं रह सकती महिलाएं, खाली रह गया 9 करोड़ का Women Hostel
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक ऐसा वूमन हॉस्टल है,जहां कोई भी महिला नहीं रहना चाहती है। यहां मामला डीएमएफ फंड के मनमाने उपयोग का भी है। शहर के सुभाष चौक के निकट डीएमएफ मद से 9 करोड़ की लागत बनाये गए वूमन हॉस्टल में रहने म
Women Hostal Korba :छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक ऐसा वूमन हॉस्टल है,जहां कोई भी महिला नहीं रहना चाहती है। यहां मामला डीएमएफ फंड के मनमाने उपयोग का भी है। शहर के सुभाष चौक के निकट डीएमएफ मद से 9 करोड़ की लागत बनाये गए वूमन हॉस्टल में रहने में महिलाएं रूचि नहीं दिखा रही हैं। हालात यह है कि अब इस हॉस्टल में बड़ी मुश्किल से एक महिला रहने आई है,वह भी ना जाने कब तक रहेगी। बहरहाल इस हॉस्टल को लेकर पूरे शहर में चर्चे हैं कि यह आबाद क्यों नहीं हो रहा है। वहीं इस महंगी सरकारी संपत्ति के रखरखाव और अन्य खरीदी पर भी सवाल उठने लगे हैं।

200 सीट वाले हॉस्टल में केवल एक महिला ?
कोरबा शहर कामकाजी महिलाएं सरकारी वूमन हॉस्टल होने के बावजूद किराए के मकानों में रहने में रूचि दिखा रही हैं।सरकार महिला एवं बाल विकास विभाग ने कम खर्च पर बढ़िया सुविधा देने के लिए महिलाओं से आवेदन भी मंगवाया,लेकिन पहली और दूसरी दफा किसी ने आवेदन जमा नहीं किया। तीसरी बार आवेदन मंगाने पर केवल एक महिला की अर्जी मिली। लगभग दो सौ सीट वाले हॉस्टल के लिए केवल एक महिला के अर्जी देने के बाद ही यह साफ़ हो गया कि वूमेन हॉस्टल का मकसद सार्थक नहीं हो सका है।

पति नहीं रहेंगे साथ,तो नहीं जाएंगी महिलाएं
कोरबा में काम करने वाली महिलाओं के इस हॉस्टल को लेकर रूचि नहीं लेने के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि हॉस्टल में रहने से पहले महिलाओं को यह सहमति देनी हॉट है कि वह अपने पति के साथ वहां नहीं रह सकेंगीं। कामकाजी महिलाओं में अधिकांश शादीशुदा होती हैं,जो अपने पति या परिवार के अन्य सदस्यों के साथ किराए पर रहना अधिक पसंद कर रही हैं. पति या परिवार को छोड़कर हॉस्टल में रहना उन्हें नहीं भा रह है,इसलिए यह स्थिति निर्मित हुई है। इधर प्रशासन की भी मजबूरी है कि पुरुषों को महिलाओं के हॉस्टल में प्रवेश नहीं दे सकता है।

करोड़ो का फर्नीचर खरीदा जा रहा है,लेकिन उपयोग करेगा कौन ?
लगभग आठ महीने बाद अब वूमन हॉस्टल के लिए लाखों का खर्च करके फर्नीचर खरीदी की जा रही है,लेकिन सवाल यह भी है कि इनका करेगा उपयोग कौन ? कोरबा नगर पालिका के प्रभारी पांडेय के मुताबिक हॉस्टल भवन के निर्माण जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी गई थी। निगम ने भवन बनाने के बाद संचालन हेतु इसे महिला एवं बाल विकास विभाग को सुपुर्द कर दिया था। अब जब फर्नीचर खरीदने का समय आया,तो इसका शिक्षा विभाग को सौंपा गया है।दरअसल अब 9 करोड़ का यह प्रशासन के गले की फांस बन चुका है।

प्रचार प्रसार की भी कमी
स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रचार-प्रसार नहीं होना भी वीमेंस हॉस्टल के खाली रहने का एक बड़ा कारण है कि कामकाजी महिलाओं को सरकार की तरफ से करोड़ों की लागत से तैयार किये गए हॉस्टल की जानकारी नहीं है। अगर प्रशासन इसके लिए सही तरीके से महिलाओं तक सूचना भेजेया प्रचार प्रसार करे, तो शायद महिलाओं का रुझान इस तरफ बढ़ेगा। बहरहाल एक महंगा ढांचा उसके कद्रदान की बाट जोह रहा है।












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