छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर केजरीवाल का कांग्रेस पर निशाना, बोले- यहां तो बुरा हाल है
छत्तीसगढ़ की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की तुलना सीएम केजरीवाल ने दिल्ली की शिक्षा से की। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुकाबले यहां शिक्षा व्यवस्था काफी बदहाल स्थिति में है।
छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को दिल्ली की सीएम व आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 9 गारंटी दी। उन्होंने इस दौरान दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था से छत्तीसगढ़ की शिक्षा की तुलना की। आप नेता व दिल्ली के सीएम ने अपने सहयोगी कांग्रेस पार्टी की सरकार को निशाने पर लिया।
अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान ने शुक्रवार का छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने की अपील की। इसके लिए आम आदमी पार्टी के दोनों शीर्ष नेताओं ने 10 बड़ी गारंटी दी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ मंच पर पंजाब के सीएम भगवंत मान भी मौजूद थे। अपने संबोधन मके दौरान सीएम केजरीवाल से छत्तीसगढ़ की कांग्रेस नेतृत्व वाली यानी अपने सहयोगी दल की सरकार को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि यहां की शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की स्थिति दयनीय है।
मंच से सीएम केजरीवाल ने कहा " यहां आने से पहले मैं एक रिपोर्ट पढ़ रहा था... बुरा हाल है सरकारी स्कूलों का। कई स्कूलों को बंद कर दिया है, जबकि अन्य में, दस कक्षाओं के लिए केवल एक शिक्षक है। कई शिक्षकों को महीनों से वेतन नहीं मिला है... शिक्षकों से पढ़ाने के अलावा हर काम लिया जा रहा है।"
सीएम ने छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था की तुलना दिल्ली के स्कूलों से करते हुए कहा कि यहां स्कूलों की हालत काफी अलग है। केजरीवाल ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा, "दोस्तों, इंटरनेट पर पता करो या दिल्ली में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से पूछो, दिल्ली सरकार के सभी सरकारी स्कूल चमक रहे हैं या नहीं। 75 साल पहले देश को आजादी मिलने के बाद से आम आदमी पार्टी की पहली सरकार है, जिसने शिक्षा पर इतना जोर दिया है। आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों के छात्र निजी संस्थानों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।"
दरअसल, कांग्रेस की छत्तीसगढ़ सरकार पर केजरीवाल ने ऐसे वक्त में ये टिप्पणी की हैस जब दोनों पार्टियों के बीच अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में दिल्ली में कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा इसको लेकर बहस छिड़ी हैं। पिछले दो लोकसभा चुनाव (2014 और 2019) में हुए राजधानी की सभी सात सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।












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