ग्रीन हाइड्रोजन से चलेगी कार, बसें, IIT Bhilai के छात्र तैयार कर रहे फ्यूल सेल, लंदन के वैज्ञानिक भी जुटे
आईआईटी भिलाई के छात्रों ने अब ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करने के प्रोजेक्ट का काम शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे 4 छात्रों को कैंब्रिज और लंदन के छात्रों का सहयोग मिल रहा है।

पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच देश में ग्रीन एनर्जी पर चर्चा हो रही है। इसके लिए इन पारम्परिक ईंधनों के विकल्प तलाशे जा रहें हैं। इसके तहत छत्तीसगढ़ में आईआईटी भिलाई ने ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। आईआईटी भिलाई के 4 एक्सपर्ट प्रोफेसर, कुछ स्टूडेंट्स इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहें हैं। इस टीम को केटीएच स्वीडन और कैम्ब्रिज लंदन में एनर्जी पर काम कर चुके भारतीय मूल के दो वैज्ञानिक मदद कर रहे हैं।

फ्यूल सेल से बनेगा हाइड्रोजन
देश में हाइड्रोजन से कार और बसें चलाने की तैयारी की जा रही है। जिस तरह पहले गाड़ियों में सीएनजी, एलपीजी का सिलेंडर लगाना पड़ता था। जबकि हाइड्रोजन के लिए इसकी जरूरत नहीं होगी। फ्यूल सेल के रूप में कार में ही हाईड्रोजन पैदा कर सकेगा।। जापान इस तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। वहीं केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया हाइड्रोजन मिशन जल्द पूरा होगा। सरकार ने इसके लिए कई बैरियर्स हटा दिए गए है।

छोटे छोटे यूनिट लगाकर किया जाएगा उत्पादन
वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रीन हाइड्रोजन ज्वलन शील होता है इसके परिवहन के खर्च को कम करने के लिए इसका उत्पादन प्रदेश में छोटी छोटी यूनिट लगाकर की जा सकेगी। जहां जरूरत होगी, वहाँ उत्पादन और उपयोग होता रहेगा। आईआईटी के मिशन हाइड्रोजन में कुछ परेशानियां भी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि इसका भी उपाय निकाल लिया जाएगा। जल्द ही पानी और सोलर एनर्जी के उपयोग से छोटी यूनिट में हाइड्रोजन बनाने का प्रोटोटाइप तैयार हो जाएगा।
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बनाया जाएगा ग्रीन हाइड्रोजन
आईआईटी के 4 विशेषज्ञों की टीम हाइड्रोजन बनाने का तरीका पूरी तरह प्राकृतिक होगा। पानी से हाइड्रोजन बनाने के लिए उसका विघटन करना पड़ता है। यह प्रक्रिया काफी महंगी है। क्योंकि हाइड्रोजन बनाने के लिए पारम्परिक ईंधन का इस्तेमाल होता है। लेकिन अब सौर उर्जा के रूप में प्राकृतिक उर्जा का इस्तेमाल होगा। हाइड्रोजन और मालिक्यूल ऑक्सीजन हाईड्रोजन एनर्जी के लिए उपयोग जाएंगे और ऑक्सीजन अस्पतालों में सप्लाई किए जाएंगे। आईआईटी भिलाई ने ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
लंदन के युवा रिसर्च में कर रहे सहयोग
डायरेक्टर राजीव प्रकाश के अनुसार आईआईटी भिलाई में कुछ छात्रों और वैज्ञानिकों की टीम ग्रीन हाइड्रोजन विषय पर कार्य कर रही है। इसके टीम में आईआईटी भिलाई के 4 एक्सपर्ट प्रोफेसर, कुछ स्टूडेंट्स को रखा है जो इस पर स्टार्टअप भी करेंगे। वर्तमान में हाइड्रोजन महंगा है। इस टीम को केटीएच स्वीडन और कैम्ब्रिज लंदन में एनर्जी पर काम कर चुके भारतीय मूल के दो वैज्ञानिक मदद कर रहे हैं। आईआईटी भिलाई के कैंपस में ग्रीन हाइड्रोजन के लिए टेस्ट बैड और ओपन लेबोरेटरी बना रहे हैं, जहां कोई इंडस्ट्री, स्टार्टअप कंपनी, स्टूडेंट्स या प्रोफेसर अपने आइडियास पर मुफ्त रिसर्च कर सकेंगे।
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