Flash Back 2022: हमेशा याद किया जायेगा "खैरागढ़ उपचुनाव" जिसने बदल दिया छत्तीसगढ़ का राजनीतिक नक्शा
खैरागढ़ उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की स्थित पहले से अधिक मजबूत हो गई,जबकि पूर्व सीएम डॉ,रमन सिंह के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे।
छत्तीसगढ़ में साल 2022 कई घटनाये घटी, जिनके गुजर जाने के बाद भी वह हमेशा याद की जाएंगी। सियासत से जुड़ी एक ऐसा ही घटनाक्रम रहा रहा " खैरागढ़ उपचुनाव ",जो कई मायनो में खास साबित हुआ।

कांग्रेस ने की खैरागढ़ में वापसी
4 नवंबर 2021 को जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ यानि जोगी कांग्रेस के विधायक देवव्रत सिंह ने निधन हो जाने के बाद खैरागढ़ विधानसभा सीट खाली हो चुकी थी। खैरागढ़ विधानसभा के लिए 12 अप्रैल 2022 को मतदान और 16 अप्रैल 2022 को मतगणना हुई है। इस चुनाव में कांग्रेस, भाजपा, जोगी कांग्रेस समेत कई अन्य दल के प्रत्याशी भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे थे,लेकिन जीत कांग्रेस के हाथ लगी। कांग्रेस को जीत यूं ही हासिल नहीं हुई, इसके पीछे राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जादू शामिल था।

भूपेश बनाम रमन की तरफ देखा गया चुनाव
खैरागढ़ उपचुनाव ना केवल वहां से नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशी लड़ रहे थे, बल्कि छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी लड़ रहे थे , यानी इस चुनाव में दोनों नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी।
इसकी वजह भी बेहद ही साफ थी,क्योंकि खैरागढ़ जीतने से पहले छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद हुए चित्रकोट, मरवाही और दंतेवाड़ा उपचुनाव में कांग्रेस ने सीएम भूपेश की अगुवाई में जीत हासिल हो चुकी थी। जबकि खैरागढ़ रियासत राजनांदगांव जिले में आती थी, उस राजनांदगांव सीट से पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह विधायक हैं, लिहाजा खैरागढ़ उपचुनाव को छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और मौजूदा सीएम के बीच की जंग के तौर पर देखा गया।

सीएम भूपेश बघेल ने पकड़ा जनता का मर्म
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ नेता देवव्रत सिंह इस सीट से विधायक थे। उनके निधन के बाद खाली हुई खैरागढ़ विधानसभा सीट को जीतकर कांग्रेस अपनी पारम्परिक सीट वापस पाना चाहती थी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य के सबसे बड़े नेता साबित हो चुके भूपेश बघेल ने खैरागढ़ की जनता के मर्म को पकड़ा और इस क्षेत्र की सालों पुरानी मांग को पूरा करने का वादा किया। कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनता से वादा किया कि कांग्रेस प्रत्याशी यशोदा वर्मा के चुनाव जीतने के 24 घंटे की भीतर खैरागढ़ को जिला बना दिया जायेगा। जिसका फायदा भी मिला और कांग्रेस ने रिकॉर्ड तोड़ मतों से यह चुनाव जीत लिया।

बदल गया छत्तीसगढ़ का राजनितिक नक्शा
खैरागढ़ उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की स्थित पहले से अधिक मजबूत हो गई,जबकि पूर्व सीएम डॉ,रमन सिंह के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। भाजपा के भीतर यह चर्चा आम हो गई कि रमन सिंह का जादू अब खत्म हो चुका है,क्योंकि उनके गढ़ में भाजपा चुनाव हार चुकी थी।
हालांकि यह चुनाव हमेशा इस लिए याद किया जायेगा,क्योंकि सियासी घमासान के फलस्वरूप ही सही ,चुनाव जे नतीजे के बाद छत्तीसगढ़ का राजनीतिक भूगोल बदल नक्शा बदल चुका था। उपचुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वादा निभाया और परिणाम आने के 3 घंटे के भीतर ही खैरागढ़ छुईखदान गंडई को एक नया जिला बनाने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में जिलों की संख्या 33 पहुंच गई।
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