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केले के तने से बन रहा इकोफ्रेंडली हैंड बैग, सीएम भूपेश के रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर

बेमेतरा जिले के ग्राम राखी के गौठान में निर्मित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में महिला स्वसहायता समूह ने केला तना से केला तना रेशा, केला तना जेल व पल्प निकालने की यूनिट लगाई गई है।

बेमेतरा, 19 अगस्त। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सुराजी ग्राम योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही हैं। क्योंकि अब ग्रामीणों ने अपने आवश्यकता की वस्तुएं गौठानो में निर्माण करना शुरू कर दिया है। बेमेतरा जिले के ग्राम राखी के गौठान में निर्मित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में महिला स्वसहायता समूह ने केला तना से केला तना रेशा, केला तना जेल व पल्प निकालने की यूनिट लगाई गई है। जहां पर महिला समूह इससे बैग व अन्य घरेलू सामग्रियों का निर्माण कर रही है। इससे महिलाएं अतिरिक्त आय प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

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कृषि विश्विद्यालय से 250 बैग का आर्डर
बेमेतरा जिले के राखी गांव की महिलाओं ने केले के तने के रेशों से 250 नग कॉन्फ्रेंस बैग तैयार किया है। इसके जिला प्रशासन के वित्तीय सहयोग से राखी गौठान में केला के तना से रेशा बनाने का यूूनिट स्थापित किया गया है जिसका संचालन उन्नति केला तना रेशा उत्पादक महिला समिति द्वारा किया जा रहा है। समिति द्वारा केला तना रेशा से 250 नग कांफ्रेंस बेग की सप्लाई इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर को आल इंडिया रबी पल्स मीट 2022 के लिए किया गया है।
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हस्तशिल्प निर्माण का मिला प्रशिक्षण
महिला समूह को केला तना से उत्पादों के निर्माण के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह राजपूूत ने बताया कि केला तना रेशा उत्पादक इकाई से केला तना रेशा निकाल कर महिला समिति द्वारा हैण्डलूम में मेट बनाने का कार्य किया जा रहा है। केला तना रेशा मेट से सिलाई मशीन के द्वारा कॉन्फ्रेंस बैग सिलाई का कार्य किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र, द्वारा उन्नति केला तना रेशा उत्पादक समिति के महिलाओं को पूर्व में हथकरघा एवं हस्तशिल्प निर्माण पर 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्य के साथ-साथ 7 दिवसीय सिलाई कार्य का भी प्रशिक्षण प्रदान करवाया गया है।

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इकोफ्रेंडली बैग बना लोगों की पहली पसन्द
उन्नति केला तना रेशा उत्पादक समिति की महिलाएं अब कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से गौठानो में कई उत्पाद तैयार रही है ये उत्पाद इकोफ्रेंडली होने के कारण लोग इसे काफी पसंद कर रहें हैं । महिला समूह ने अब अपने अपने उत्पाद को सी मार्ट के माध्यम से विक्रय करने की तैयारी कर ली है। इसके साथ अब उनमें आर्थिक सक्षमता आ रही है। जिससे वे समूह में और भी नए कार्य की शुरुआत कर रही हैं।

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प्रतिदिन 50-60 किलो रेशे की आपूर्ति

उन्नति किसान उत्पादक सहकारी समिति मर्या. साजा के द्वारा महिला समुह को 5 लाख रुपये का लोन प्रदान किया गया है। केला तना की निरंतर पूर्ति किसान उत्पादक संगठन द्वारा केला उत्पादक कृषकों से संपर्क कर करायी जा रही है। केला तना रेशा प्रतिदिन 50-60 किलोग्राम निकाला जा सकता है। केला तना रेशा की आपूर्ति खादी ग्रामोद्योग, हाथकरघा विभाग बुनकर समिति, गुजरात पश्चिम बंगाल एवं अन्य राज्यों के विभिन्न कम्पनियों को किया जायेगा।

इन उत्पादों का हो रहा निर्माण
महिला समिति द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, बेमेतरा के तकनीकी सहयोग से केला तना रेशा मेट से फाइल-फोल्डर, कान्फ्रेन्स बेग, लेपटॉप बेग, पर्दा इत्यादि के साथ-साथ हस्तशिल्प कार्य से हैण्डबेग, टेबल रनर एवं अन्य उत्पाद तैयार किये जा रहे है। केला तना रेशा से निर्मित हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों को छग शासन के विभिन्न विभागों में होने वाले प्रशिक्षण, कान्फ्रेन्स, वर्कशॉप एवं कार्यालयीन उपयोग के लिए मांग अनुसार आपूर्ति की कार्ययोजना बनाई जा रही है।

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