Chhattisgarh: झीरम घाटी हत्याकांड जांच आयोग का कार्यकाल बढ़ा, BJP ने उठाये सवाल, CM भूपेश ने दिया जवाब
छत्तीसगढ़ सरकार ने झीरम घाटी जांच आयोग का कार्यकाल 10 अगस्त 2023 तक के लिए बढ़ा दिया है। आयोग ने भूपेश बघेल सरकार को बताया था कि घटना की जांच अभी अधूरी है,इस कारण कार्यकाल बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड के 10 साल बाद भी मृतकों को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। इधर जांच पूरी ना होने पर राज्य सरकार ने इस भीषण नक्सल हमले की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग का कार्यकाल 6 महीने के लिए फिर बढ़ा दिया है। आयोग का कार्यकाल बढ़ाये जाने पर भाजपा ने कांग्रेस सरकार से कड़े प्रश्न पूछे हैं,तो वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बार फिर एनआईए की जांच पर सवाल उठाए हैं।

जांच के बाद भी जारी है जांच
छत्तीसगढ़ सरकार ने झीरम घाटी जांच आयोग का कार्यकाल 10 अगस्त 2023 तक के लिए बढ़ा दिया है। आयोग ने भूपेश बघेल सरकार को बताया था कि घटना की जांच अभी अधूरी है,इस कारण कार्यकाल बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। ज्ञात हो कि 25 मई 2013 को सुकमा जिले के झीरम घाटी में माओवादियों ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चलाई जा रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला करके 32 नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की नृशंस हत्या की थी।
वारदात के बाद तत्कालीन बीजेपी सरकार ने जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग का गठन किया था। भूपेश बघेल सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रशांत मिश्रा आयोग ने जांच रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी थी,जिसपर पर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। जांच पर सवाल उठाने के बाद नवंबर 2021 कांग्रेस सरकार ने सेवानिवृत न्यायाधीश सतीश अग्निहोत्री और जस्टिस मिन्हाजुद्दीन को झीरम घाटी कांड न्यायिक जांच आयोग जिम्मेदारी सौंप दी थी। आयोग ने जांच में नए बिंदु जोड़कर घटना की जांच नए सिरे से शुरू की थी। इधर इस मामले में NIA भी जांच रही है।

भाजपा ने उठाये सवाल
इधर छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और रमन सरकार में मंत्री रहे अजय चंद्राकर ने झीरम घाटी कांड न्यायिक जांच आयोग का कार्यकाल 6 माह बढ़ाये जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि झीरम का सच सबके सामने है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जांच आयोग बनाने की कोई जरूरत नहीं थी। झीरम कांड के प्रत्यक्षदर्शी कवासी लखमा तो उनकी सरकार में मंत्री हैं। भूपेश बघेल उनसे पूछ लें। वे जिसका नाम लें, भूपेश उसे फांसी पर लटकवा दें। कवासी लखमा से तो रोज पूछताछ होनी चाहिए। झीरम के पीड़ितों को चार साल में क्या मिला?
अजय चंद्राकर ने अपने बयान में कहा कि जांच आयोग बनाने की जरूरत नहीं थी लेकिन कांग्रेस को राजनीति करनी है। यदि जांच रिपोर्ट समय पर आएगी तो कांग्रेस इस मुद्दे पर क्या राजनीति करेगी। उन्होंने भूपेश बघेल सरकार द्वारा बनाई गई कमेटियों के औचित्य पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इतनी कमेटी बनाई, कई जांच आयोग बनाए, उनमें से किसी की भी जांच रिपोर्ट नहीं आई। उन्होंने कहा कि क्या शराबबंदी कमेटियों की रिपोर्ट आई, क्या स्काईवॉक कमेटियों की रिपोर्ट आई, क्या भूपेश बघेल सरकार द्वारा गठित झीरम जांच आयोग की रिपोर्ट आई? जब प्रत्यक्षदर्शी कांग्रेस सरकार में मंत्री है तो उनसे ही पूछ लें कि सच क्या है। हो गई जांच और क्या। नाटक बंद करना चाहिए।

भूपेश बघेल को NIA की जांच पर नहीं है विश्वास
झीरम घाटी की जांच के लिए आयोग का कार्यकाल बढ़ाये जाने पर भाजपा के सवाल पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, भाजप सही जांच चाहती है तो NIA से जांच न कराएं, मामले की जांच छत्तीसगढ़ सरकार को करने दें। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि झीरम घाटी हत्याकांड मामले में पूर्व सीएम रमन सिंह और पूर्व आईजी मुकेश गुप्ता का नारको टेस्ट होना चाहिए। भाजपा की तरफ से झीरम नक्सल घटना के प्रत्यक्षदर्शी और भूपेश सरकार के मौजूदा मंत्री कवासी लखमा के नार्को टेस्ट कराने की मांग पर कहा कि कवासी लखमा के नारको टेस्ट से हमें कोई समस्या नहीं है।
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कांग्रेस ने भाजपा की भूमिका पर सवाल उठाये
इस मामले में कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि के बड़े नेता जीरम की जांच को रोकने लगातार कोशिशें कर रहे उसमें साफ हो रहा जीरम के पीछे तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका संदिग्ध है। जीरम आयोग के कार्यकाल बढ़ाने पर भाजपा तिलमिला क्यो रही है? पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक द्वारा हाईकोर्ट से स्टे लिये जाने के कारण आयोग का कार्यकाल बढ़ाये जाने के बाद जांच शुरू नहीं हो पाई है फिर से आयोग का कार्यकाल बढ़ाना पड़ा।
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