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छत्तीसगढ़: कांग्रेस के छत्तीसगढ़ियावाद को लगा धक्का, मिशन 2023 के लिए विपक्ष को मिला मुद्दा !

रायपुर, 06 मई। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के लिए आरक्षित राज्यसभा सीटों में बिहार की रंजीता रंजन और यूपी के राजीव शुक्ला को नामांकित किया है। बहरहाल राज्यसभा के तय नामों को लेकर पक्ष विपक्ष ने जबरदस्त टकराव देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की भाषा, रहन सहन और संस्कृति को संरक्षण देकर स्थानीय लोगों को स्थापित करने की वकालत करने वाली कांग्रेस और भूपेश बघेल सरकार के मिशन 2023 के चुनावी अभियान को धक्का लगा है।

केवल फूलोदेवी ही छत्तीसगढ़ी मूल की सांसद, तुलसी,रंजीता ,राजीव आउटर

केवल फूलोदेवी ही छत्तीसगढ़ी मूल की सांसद, तुलसी,रंजीता ,राजीव आउटर

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ियावाद को लेकर बेहद मुखर है। कांग्रेस प्रदेश की स्थानीय संस्कृति, भाषा, खानपान और जातियों को तव्वजो देकर आम जनता के बेहद करीब पहुंच चुकी है। कांग्रेस के जितने भी विधायक हैं, अधिकांश स्थानीय किसान, ठेठ छत्तीसगढ़िया नेता की पहचान रखते हैं। कुलमिलाकर कहा जाये, तो छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भीतरी और बाहरी के मुद्दे का जमकर लाभ लिया है।

भूपेश बघेल और उनकी सरकार की छवि छत्तीसगढिया सरकार की बन चुकी है।बहरहाल राज्यसभा में यह स्थित बदल रही है। राज्यसभा में छत्तीसगढ़ की पांच सीटे हैं। नए सांसदों की एंट्री से छत्तीसगढ़ से अब केवल फूलोदेवी नेताम ही छत्तीसगढ़ मूल की सांसद होंगी ,जबकि शेष तीन दिल्ली, यूपी और बिहार मूल के होंगे।

भूपेश के छत्तीसगढ़ियावाद को लगा धक्का

भूपेश के छत्तीसगढ़ियावाद को लगा धक्का

इधर जिस प्रकार से अपने भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान सीएम भूपेश बघेल आम जनता से मिल रहे हैं, उसमें उनके छत्तीसगढिया अंदाज का पुट साफ नजर आ रहा है। वहीं कभी किसानों के साथ भोजन करते नजर आ रहे हैं, तो कभी बच्चों के साथ पारम्परिक खेल खेलते हुए दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने मजदूर दिवस पर छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजन बोरे बासी की ब्रांडिंग करते हुए उसके फायदे गिनाये थे।

इसी प्रकार वह कभी ट्रेक्टर चलाते भी नजर आ रहे हैं, जिसे देखकर साफ तौर पर समझा जा सकता है कि कि भूपेश बघेल मिशन 2023 में भी जीत पक्की करने के लिए छत्तीसगढ़ियावाद का सहारा लेंगे। लेकिन राज्यसभा के तय नामों ने छत्तीसगढ़ियों के बीच अपने अपनेपन का एहसास कराने वाले इस जादू को कम कर दिया है। क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ के नेताओं को तवज्जों नहीं दिए जाने से कांग्रेसी खेमे के भीतर और बाहर निराशा और आक्रोश देखा जा रहा है।

भाजपा में कम है छत्तीसगढ़ मूल के नेता

भाजपा में कम है छत्तीसगढ़ मूल के नेता

अगर भाजपा की पृष्ठभूमि की बात की जाये, तो रमन सरकार के कार्यकाल के दौरान मंत्री और विधायकों में बड़ी तादाद ऐसी रही है, जो मूल तौर से छत्तीसगढ़ की संस्कृति से नहीं जुड़े हुए हैं। भाजपा में एक बड़ा वर्ग व्यापार जगत से ताल्लुकात रखने वालों से जुड़ा हुआ है, जिसमें छत्तीसगढ़ के, किसान, ओबीसी, आदिवासी, एससी, एसटी इत्यादि की संख्या कांग्रेस की तुलना में कम है।

कांग्रेस भाजपा की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर भाजपा पर परदेसियों को बढ़ावा देने वाली पार्टी कहती आ रही है, जिसका उसे पिछले चुनाव में फायदा भी मिला था। लेकिन कांग्रेस आलाकमान के राज्यसभा को लेकर किये गए फैसले ने भूपेश बघेल की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है।

मूणत के ट्ववीट ने साफ़ की भाजपा की रणनीति

मूणत के ट्ववीट ने साफ़ की भाजपा की रणनीति

पूर्व मंत्री और भाजपा प्रवक्ता राजेश मूणत के ट्ववीट से भाजपा की आगामी रणनीति साफ़ नजर आ जाती है। भाजपा अब छत्तीसगढियावाद के बहाने ही कांग्रेस को आड़े हाथों ले रही है। राजेश मूणत ने सोमवार को लगातार दो ट्वीट करके भाजपा की मंशा साफ कर दी। उन्होंने बोरे बासी की तस्वीर के साथ लिखा कि तथाकथित छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री जी आपका छत्तीसगढ़ मॉडल बासी हो गया है।

आपकी सरकार हर मोर्चे पर विफल है, अब तो गांधी परिवार भी आपकी नही सुनता, आप सरगुजा से बस्तर तक फ्लॉप हो चुके हैं। वहीं उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि तथाकथित छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री जी आज की तारीख लिख लीजिए, जब जब आप भौरा चलाकर, गेड़ी चढ़कर छत्तीसगढ़िया होने का नाटक करेंगे, आपको 3 कांग्रेसी राज्यसभा सांसदो के नाम और काम याद दिलाये जाएंगे।

क्या कहना है कांग्रेस का ?

क्या कहना है कांग्रेस का ?

इधर कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि भाजपा को पहले इस बात का आंकलन करना चाहिए कि वह छत्तीसगढ़ में आज कहां खड़ी है क्योंकि जनता से उसे इस लायक भी नहीं छोड़ा है कि वह राज्यसभा के बारे में सोच भी सकें। भारतीय जनता पार्टी को इस बात का जवाब देना चाहिए कि नरेंद्र मोदी और स्मृति ईरानी ने गुजरात से बाहर जाकर यूपी में चुनाव क्यों लड़े? कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि लोकसभा और राज्यसभा के चुनाव राज्य की सीमा के बाहर होते हैं। भाजपा नेताओ की अनावश्यक बयानबाजी पार्टी की ओछी मानसिकता को दर्शाता है।

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