CG: खैरागढ़ वन और खनिज संपदा से भरपूर है, मोहला-मानपुर,नए जिलों में राजस्व बढ़ाने संसाधनों की तलाश
दुर्ग, 16 सितम्बर। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से अलग होकर बने नवगठित मोहला-मानपुर और खैरागढ़ जिले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा विधिवत शुभारंभ के बाद नए सरकारी दफ्तर खुल चुके है। सभी विभागों का सेटअप तैयार किया जा रहा है। इसके साथ साथ इन जिलों में राजस्व बढ़ाने के स्त्रोत तलाशे जा रहें है। इसके लिए वन और खनिज संपदा पर फोकस किया जा रहा है। वैसे तो नवगठित जिले खनिज और वन संपदा के मामले में समृद्ध हैं। दोनों ही जिले में वन संसाधनों की कोई कमी नही है। लेकिन जिले में विकास कार्यों के लिए DMF फंड और अन्य मदों में आय के स्त्रोत तलाशने के काम अधिकारी के रहें हैं।

मोहला-मानपुर में स्थित है आयरन ओर की दो खदानें
महाराष्ट्र बॉर्डर से लगे हुए सघन जंगलों वाले मोहला-मानुपर अम्बागढ़ चौकी जिला शुरू से ही अविकसित रहा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण मोहला मानपुर में विकास की गति को रोकने का प्रयास किया जाता रहा है। इस क्षेत्र में भले ही इंडस्ट्री, बड़े बाजार नहीं हैं। लेकिन यहां मौजूद खनिज और वन संपदा इस जिले के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। क्योंकिमोहला मानपुर - अंबागढ़ चौकी जिले में पल्लेमाड़ी क्षेत्र में संचालित दो आयरन ओर के प्लांट इस क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। इस प्लांट में ही आसपास के ग्रामीणों को रोजगार भी मिला है। इससे ही शासन को सालाना 15 से 20 करोड़ रुपए का राजस्व मिल जाता है।

खैरागढ में बॉक्साइट और लाइम स्टोन की संभावना
नवगठित खैरागढ जिले में लघु वनोपज काफी मात्रा में पाए जाते हैं। खनिज मामले में यहां सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन, बॉक्साइट उपलब्ध है। जिसके कई बार अवैध खनन के मामले सामने आते रहें हैं। अगर राज्य सरकार की ओर से इसकी नीलामी कराई जाएगी तो इस जिले को बड़ा राजस्व मिल सकता है। खनिज अधिकारी राजेश माल्वे ने बताया कि जिले में मिश्रित खनिज पाया जाता है। उन्होने बताया कि सीमेंट ग्रेड चूना पत्थर की खदानों को सीमेंट कंपनियों को ब्लॉक बनाकर नीलाम किया जाता हैं। फिलहाल शासन स्तर पर यह प्रक्रिया पेंडिंग है।

खैरागढ को बांस से मिलेगा करोड़ों का राजस्व
खैरागढ जिले का 40 प्रतिशत हिस्सा वनों से आच्छादित है। इस जिले का कुछ क्षेत्र नक्सलियों से प्रभावित भी है। लेकिन बड़ी घटनाएं अब तक यहां नही हुई। वनो की अधिकता के कारण खैरागढ़ जिला बांस उत्पादन के मामले में समृद्ध है। यहां पर अलग-अलग क्वालिटी के बांस पाए जाते हैं। जिसकी हर साल बड़े पैमाने पर नीलामी होती है। यहां वन विभाग द्वारा वर्ष 2021-22 में करोड़ों रुपए के बांस की नीलामी हुई थी। खैरागढ़ वन मंडल प्रदेश के बांस वनक्षेत्र की दृष्टि से बड़े वन मंडलों में से एक है। वर्ष 2020-21 में वन मंडल ने 4585.245 हेक्टेयर क्षेत्र के बांस का उत्पादन कर परिवहन किया। इस पूरी प्रक्रिया में वन विभाग को 11 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था।
मानपुर के महुआ और तेंदूपत्ता की डिमांड ज्यादा
मानपुर मोहला जिले में वन संसाधनों में महुआ का भरपूर उत्पादन किया जाता है। इसके साथ ही तेंदूपत्ता के अच्छी क्वालिटी के कारण अन्य राज्यों के व्यापारी यहां के तेंदुपत्ते को ज्यादा पसंद करते हैं। इस क्षेत्र के तेंदूपत्ता की डिमांड ज्यादा हैं। इस क्षेत्र में महुआ का संग्रहण भी अच्छा होता है। अब तो इस क्षेत्र में संग्रहित महुआ प्रोसेसिंग यूनिट तक जाने लगा है। वन अधिकरियों के अनुसार मोहला- मानपुर क्षेत्र के जंगलों में औषधि गुणों वाले पेड़, पौधे भी पाए जाते हैं।
इमारती लकड़ियों से होगी आय, रोजगार के बढ़ेंगे साधन
मानपुर-मोहला और खैरागढ दोनों ही जिले में बांस, सागौन और अन्य इमारती लकड़ी निकलती है। दोनों ही जिलों में वन विभाग की ओर से हर साल वनांचल के ग्रामीणों से करोड़ों रुपए के वनोपज की खरीदी की जाती है। मानपुर मोहला जिले में वन संपदा के रूप में सागौन का बड़ा जंगल है। इसके लिए संरक्षण के लिए बाकायदा पानाबरस प्रोजेक्ट भी बनाया गया है। पानाबरस के आसपास सागौन के साथ ही बांस में भी जंगल हैं।












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