CG: भाजपा नेता संजय श्रीवास्तव ने कसा दीपक बैज पर तंज, कहा- अब उनकी दाल नहीं गलने वाली
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव ने रविवार को बयान जारी करके कहा कि देश को 60 वर्षों तक लूटने वाली पार्टी के लोग संविधान बदलने और आरक्षण की बात न करें। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्तीन में आयोजित सभा में ही स्पष्ट कर दिया है कि मोदी तो क्याा बाबा साहब आंबेडकर भी आकर कहें तो देश का संविधान नहीं बदल सकता। इसके बाद भी कांग्रेसी जनता के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
संजय श्रीवास्तव ने कहा कि लोगों की पैत्रिक संपत्ति और मंगलसूत्र पर नजर रखने वाले कांग्रेसियों को जनता पहचान चुकी है, अब उनकी दाल नहीं गलने वाली, जनता उन्हें देश में 400 से अधिक और छत्तीअसगढ़ की सभी 11 सीटों पर हैसियत दिखाएगी। भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव ने कांग्रेस अध्यतक्ष दीपक बैज के बयान पर प्रतिक्रिया व्यपक्ते की है। कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर आरोप लगाया है कि उनका उद्देश्य है संविधान बदल कर देश का लोकतंत्र तबाह कर देना है। दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों का आरक्षण छीन कर देश चलाने में उनकी भागीदारी खत्म करना।

संजय श्रीवास्तव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान हास्यास्पद है। भाजपा ही वह पार्टी है जो संविधान और आरक्षण की रक्षा के लिए चट्टान की तरह कांग्रेस की राह में खड़ी है। जब तक भाजपा है - वंचितों से उनका आरक्षण दुनिया की कोई ताकत नहीं छीन सकती। कांग्रेस की प्रदेश में पांच वर्ष तक सरकार थी इस दौरान आरक्षण बिल को अटकाने और लटकाने का काम कांग्रेस ने किया। भाजपा ने अपने पिछले कार्यकाल में हाइकोर्ट की मंशानुरूप वरिष्ठय नेता ननकीराम कंवर के नेतृत्व में जातिगत सर्वे करवाकर रिपोर्ट तैयार कर ली थी। लेकिन कांग्रेस ने तीन वर्षों तक इसे हाइकोर्ट के सामने पेश किया।
संजय श्रीवास्तव ने कहा कि हाइकोर्ट ने जब सख्त हिदायत दी तो आनन फानन में क्वांटिफाईबल डाटा आयोग की रिपोर्ट तैयार तो कराई, लेकिन वह रिपोर्ट न तो राजभवन पहुंची और नही सदन के पटल पर विधानसभा में रखी गई। जबकि भाजपा ने आरक्षण बिल पर पूर्ण बहुमत से विधानसभा मे प्रस्तापव पास कर भेजा था। लेकिन कांग्रेस सरकार ने एक आरटीआई कार्यकर्ता कुणाल शुक्लाा के जरिए सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेकर प्रक्रिया को बीच में अटका दिया। इसके बदले इस आरटीआई कार्यकर्ता को कबीर विकास संचार केंद्र शोधपीठ के अध्यक्ष का पद देकर उपकृत भी किया गया।
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