क्या है महादेव एप घोटाला? छत्तीसगढ़ सरकार ने जिसकी जांच CBI को सौंपी, जांच के दायरे में हैं पूर्व सीएम भूपेश
Mahadev App: छत्तीसगढ़ सरकार महादेव सट्टा ऐप घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने जा रही है। ऐसा तब हो रहा है जब राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में 70 मामले दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि सीबीआई को फाइलें सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे घोटाले में फंसे लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यकाल में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को इस मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अक्टूबर 2022 में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच शुरू की थी। दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद ईडी की संलिप्तता शुरू हुई।

सीबीआई हुई सक्रिय, कांग्रेस की बढ़ी टेंशन
छत्तीसगढ़ में भाजपा कि सरकार बनने के बाद सीबीआई की सक्रियता काफी बढ़ गई है। महादेव सट्टा ऐप घोटाले की जांच के अलावा, वे सीजीपीएससी 2021 भर्ती और बिरनपुर हिंसा मामलों की भी जांच कर रहे हैं। हाल के वर्षों में यह उनकी तीसरी बड़ी जांच है। इन मामलों में सीबीआई का प्रवेश राज्य के भीतर भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों की जांच के व्यापक दायरे को जता रहा है। केंद्रीय जांच एजेंसियों की सारी जांच पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर हुए घोटालों के खिलाफ है।
जनवरी 2024 में अकेले रायपुर में इस मामले से जुड़े 80 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि पूरे राज्य में करीब 600 लोगों को गिरफ्तार किया गया। ईडी ने अगस्त 2023 में पहली गिरफ्तारी की और इसे मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों से जोड़ा। इसके बाद ईडी अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कई करीबी लोगों से पूछताछ की।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल पर बड़े आरोप
नवंबर 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर आरोप लगे थे कि उन्होंने महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के जरिए बघेल को 508 करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी। इस दावे को ईडी की चार्जशीट में शामिल किया गया था, जिससे बघेल की राजनीतिक स्थिति और भी जटिल हो गई थी।
विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने इन आरोपों का जमकर फायदा उठाया और घोटाले में शामिल होने के लिए पिछली कांग्रेस सरकार की आलोचना की। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने भूपेश बघेल को आरोपी बनाते हुए एफआईआर दर्ज की है। इस घटनाक्रम ने पहले से ही पेचीदा मामले में एक और पेचीदगी जोड़ दी है।ज्ञात हो कि महादेव सट्टा ऐप पोकर, कार्ड गेम, क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस और फुटबॉल जैसे विभिन्न लाइव गेम पर अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए एक मंच प्रदान करता है।
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सट्टेबाज तीन पत्ती और ड्रैगन टाइगर जैसे खेलों पर दांव लगाने के लिए अन्य ऐप का भी उपयोग करते हैं। इस व्यापक अवैध गतिविधि ने कई राज्यों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने जाँच की है। इस घोटाले से जुड़े घटनाक्रम की महत्त्वपूर्ण तारीख 3 नवंबर 2023 की है, जब ईडी ने दुबई से रायपुर ले जाई जा रही करोड़ों की नकदी जब्त करते हुए असीम दास और कांस्टेबल भीम सिंह यादव को गिरफ्तार किया था। इसमें से एक प्रमोटर ने एक वीडियो जारी कर तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल पर 508 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया था।
भिलाई से आने वाले सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल महादेव ऑनलाइन बुक एप के मेन प्रमोटर थे। दोनों ही गतिविधियां दुबई से संचालित करते थे ।ईडी ने एक बयान में बताया था कि महादेव बुक कई तरह की वेबसाइट और चैट एप्स पर कई तरह के समूह चलाता है।इसके प्रमोटर अपनी वेबसाइट पर लोगों के कांटैक्ट नंबर का विज्ञापन चलाते थे और लोगों को लाभ कमाने के लिए गेम खेलने का प्रलोभन देते हैं। ऐसे नंबरों को मात्व्हार ट्सप्प पर ही संपर्क किया जा सकता है। एक बार जब यूजर इस नंबर से संपर्क करता है, तो उसे दो अलग नंबर दिए जाते हैं। एक कांटेक्ट नंबर पैसे जमा करने और सट्टा खेलने वालों को उपयोगकर्ता आईडी में मिलने वाले पॉइंट्स के लिए होता है। वहीं दूसरा नंबर जुटाए गए पॉइंट्स को भुनाने के लिए वेबसाइट से जुड़ने के लिए होता था।












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