भाजपा को भा गया भूपेश का गणित , छत्तीसगढ़ के मिशन 2023 में खेती किसानी होगा अहम मुद्दा।
भाजपा को भा गया भूपेश का गणित , छत्तीसगढ़ के मिशन 2023 में खेती किसानी होगा अहम मुद्दा।
रायपुर, 06 मई। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ियावाद को लेकर बेहद मुखर है। कांग्रेस प्रदेश की स्थानीय संस्कृति, भाषा, खानपान और जातियों को तव्वजो देकर आम जनता के बेहद करीब पहुंच चुकी है। कांग्रेस के जितने भी विधायक हैं, अधिकांश स्थानीय किसान, ठेठ छत्तीसगढ़िया नेता की पहचान रखते हैं। कुलमिलाकर कहा जाये, तो छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भीतरी और बाहरी के मुद्दे का जमकर लाभ लिया है। भूपेश बघेल और उनकी सरकार की छवि छत्तीसगढिया सरकार की बन चुकी है। यह बात अब भाजपा भी समझ चुकी है, लिहाजा वह भी इसी फार्मूले को आजमाने की दिशा में आगे बढ़ने वाली है।

अब भाजपा का फोकस छत्तीसढ़िया और किसानों पर
भाजपा ने छत्तीसगढ़ में अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। वह पूरे प्रदेश में जनसम्पर्क अभियान चला रही है। भाजपा के प्रमुख पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों ने अपने-अपने मंडलों और बूथ केंद्रों में जाकर कार्यकर्ताओं से चर्चा करना प्रारम्भ कर दिया है। बताया जा रहा है कार्यकर्ताओं से मिल रहे फीड बैक के आधार पर भाजपा कमजोर बूथ को मजबूत करना चाहती है। भाजपा ने मिशन 2023 के तहत छत्तीसढ़िया और किसानों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा नेताओं की तरफ से हर बूथ पर एक पत्रक भरवाया जा रहा है, जिसमें बूथ के सामाजिक, जातिगत समीकरण के साथ उस स्थान के मुद्दों पर भी जानकारी ली जा रही है।

भाजपा नेताओं को दस दिन, दस घंटे बूथ में देना अनिवार्य
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ की स्थापना भाजपा ने की थी, लेकिन छत्तीसगढ़िया का मुद्दा कांग्रेस उठा रही है। अब समय आ गया है कि जनता को यह बताया जाए कि छत्तीसगढ़ अटल जी और भाजपा की देन है। छत्तीसगढ़ में रमन सरकार ने 15 साल तक छत्तीसगढ़ियों और किसानों के भले के लिए काम किया है। बहरहाल भाजपा नेता हर बूथ में जाकर केंद्र सरकार की उपलब्धियों को लेकर जा रहे हैं। इसके साथ ही भूपेश सरकार के अधूरे वादों से भी जनता को रूबरू करवा रहे हैं। भाजपा संगठन ने इसके लिए बकायदा एक पॉम्प्लेट भी बनवाया है, जिसे बूथों पर सक्रिय पदाधिकारियों के साथ मतदाताओं को भी दिया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि 5 मई से 20 मई तक भाजपा अपना अभियान चला रही है, जिसके तहत भाजपा नेताओं को दस दिन, दस घंटे बूथ में देना अनिवार्य है। इन 100 घंटों के दौरान बूथ की संरचना से लेकर बूथ को सशक्त करने की दिशा में काम करना है।

भूपेश अगले चुनाव में भी छत्तीसगढ़ियावाद का लेंगे सहारा
इधर जिस प्रकार से अपने भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान सीएम भूपेश बघेल आम जनता से मिल रहे हैं, उसमें उनके छत्तीसगढिया अंदाज का पुट साफ नजर आ रहा है। वहीं कभी किसानों के साथ भोजन करते नजर आ रहे हैं, तो कभी बच्चों के साथ पारम्परिक खेल खेलते हुए दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने मजदूर दिवस पर छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजन बोरे बासी की ब्रांडिंग करते हुए उसके फायदे गिनाये थे। इसी प्रकार वह कभी ट्रेक्टर चलाते भी नजर आ रहे हैं, जिसे देखकर साफ तौर पर समझा जा सकता है कि भूपेश बघेल अगले चुनाव में छत्तीसगढ़ियावाद का सहारा लेंगे।

भाजपा के मुकाबले कांग्रेस ने अधिक स्थानीय
अगर भाजपा की पृष्ठभूमि की बात की जाये, तो रमन सरकार के कार्यकाल के दौरान मंत्री और विधायकों में बड़ी तादाद ऐसी रही है, जो मूल तौर से छत्तीसगढ़ की संस्कृति से नहीं जुड़े हुए हैं। भाजपा में एक बड़ा वर्ग व्यापार जगत से ताल्लुकात रखने वालों से जुड़ा हुआ है, जिसमें छत्तीसगढ़ के, किसान, ओबीसी, आदिवासी, एससी, एसटी इत्यादि की संख्या कांग्रेस की तुलना में कम है। कांग्रेस भाजपा की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर भाजपा पर परदेसियों को बढ़ावा देने वाली पार्टी कहती आ रही है, जिसका उसे पिछले चुनाव में फायदा भी मिला था।
यह भी पढ़ें छत्तीसगढ़: जनता की चौपाल में सीएम भूपेश का एक्शन, नायक के अनिल कपूर की तरह किया ऑन स्पॉट फैसला
यह भी पढ़ें छत्तीसगढ़: लॉज के कमरे में मिली चार लाशें, पुलिस भी देखकर रह गई दंग












Click it and Unblock the Notifications