बीजापुर हमला: नक्सलियों ने बनाया था 'U फॉर्मेशन', घायल होने के बाद भी जवान देते रहे मुंहतोड़ जवाब

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा सीमा पर शुक्रवार को कई बड़े नक्सलियों के छिपे होने की खबर मिली। जिसके बाद शनिवार को एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया, जिसमें सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो, बस्तर बटालियन और जिला रिजर्व गार्ड के 2000 जवान शामिल थे। योजना के मुताबिक जवानों ने अलग-अलग टीमें बनाकर जंगल में एंट्री की। शुरुआत में नक्सलियों ने उन्हें नहीं रोका लेकिन जब जवान बीच जंगल में पहुंचे तो दोनों का आमना-सामना हुआ। इसी भीषण मुठभेड़ में 23 जवान शहीद हो गए, जबकि 31 से ज्यादा घायल हैं।

इन दो कुख्यात की थी तलाश

इन दो कुख्यात की थी तलाश

सूत्रों के मुताबिक लंबे वक्त से नक्सल कमांडर माडवी हिडमा और उसकी सहयोगी सुजाता की तलाश थी। शुक्रवार को दोनों के बीजापुर के तर्रेम इलाके के जोनागुड़ा पहाड़ी में छिपे होने की खबर मिली। इन्हीं दो बड़े नक्सलियों के सफाए के लिए शुक्रवार रात प्लानिंग हुई और बीजापुर जिले के तर्रेम, उसूर, सुकमा जिले के मिनपा और नरसापुरम से जवानों को तैयार कर ऑपरेशन के लिए भेजा गया। सूत्रों का कहना है कि बड़े कमांडरों के छिपे होने की जानकारी ही नक्सलियों का जाल था। जिस वजह से सुरक्षाबलों को इतना नुकसान हुआ।

मुठभेड़ स्थल पर क्या हुआ?

मुठभेड़ स्थल पर क्या हुआ?

सूत्रों ने बताया कि मुठभेड़ स्थल पर 400 नक्सली मौजूद थे। उन्होंने 'U फॉर्मेशन' बनाई और जवानों पर गोलाबारी शुरू कर दी। 'U फॉर्मेशन' का मतलब होता है कि तीन तरफ से एक साथ हमला करना। जिस वजह से 23 जवान शहीद हुए। इस दौरान घायल जवानों ने भी तगड़ी जवाबी कार्रवाई की। जिसमें बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए। उन्हें हुए नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नक्सलियों को अपने साथियों का शव जंगल के अंदर ले जाने के लिए चार ट्रालियां लगानी पड़ीं।

सीआरपीएफ डीजी ने कही ये बात

सीआरपीएफ डीजी ने कही ये बात

वहीं सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह ने भी खुफिया विफलता की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि ये कहने का कोई मतलब ही नहीं है कि इस ऑपरेशन में खुफिया जानकारी की विफलता थी। अगर ऐसा होता तो सीआरपीएफ के जवान अंदर जाते ही नहीं, इसके अलावा इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों की मौत भी ना होती। वहीं नक्सल विरोधी अभियान के प्रमुख अशोक जुएजा ने कहा कि गोलीबारी सुबह 11.30 के करीब हुई। उस दौरान नक्सलियों ने रॉकेट लांचर, ग्रेनेड और ऑटोमेटिक हथियारों से हमला किया। जिस वजह से सुरक्षाबलों को ज्यादा नुकसान हुआ।

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