सीएम भूपेश से मिला आश्वासन ,आदिवासी समाज ने किया अपना आंदोलन स्थगित,जानिए क्या है आदिवासियों की मांगे ?
Assurance received from CM Bhupesh, tribal society suspended its movement, know what are the demands of tribals?
रायपुर, 25 मार्च। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात करने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार से नाराज चल रहे सर्व आदिवासी समाज ने अपना आंदोलन फ़िलहाल वापस ले लिया है। गौरतलब है कि अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हजारों ग्रामीण राज्य के बालोद और धमतरी जिले के सीमा पर बसे गांव चिटौद रायपुर जाने के लिए इकठ्ठा हो चुके थे। आदिवासी समाज के प्रदर्शनकारियों ने राजधानी रायपुर में बड़ा विरोध प्रदर्शन करने का एलान किया था।

आंदोलन की राह पर चल चुके सर्व आदिवासी समाज के नेताओं ने शुक्रवार को रायपुर में सीएम भूपेश बघेल से मुलाकात करने के बाद अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के उपाध्यक्ष सुरजू टेकाम के मुताबिक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासी समाज की सभी प्रमुख मांगों पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया है। सर्व आदिवासी समाज को सीएम भूपेश बघेल से हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश हुई सारकेगुड़ा और एडसमेटा घटनाओं की न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार दोषियों पर कार्रवाई का आश्वास मिला है। मिली जानकारी के मुताबिक सर्व आदिवासी समाज ने सरकार को मांगे माने जाने के संबंध में महज 1 महीने का समय दिया है, अगर सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है,तो फिर से आंदोलन होगा।
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छत्तीसगढ़ के सर्व आदिवासी समाज की मुख्य मांगे हैं -
(1) एडसमेटा और सरकेगुड़ा घटना की न्यायिक जांच रिपोर्ट को सार्वजानिक करके दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए ।
(2) बस्तर में पुलिस कैंप बंद करने, फर्जी मुठभेड़ रोकने , आदिवासियों की गिरफ्तारी बंद करने की मांग ।
(3) जेलों में सजा भोग रहे निर्दोष आदिवासियों की तत्काल रिहाई करने की मांग
(4 ) संविधान के मुताबिक पेसा कानून धारा कानून लागू करने की मांग
(5 ) संविधान के 5वी अनुसूची तहत आंध्रप्रदेश के अनुसूचित क्षेत्र भूहस्तांतरण विनियम कानून की तर्ज पर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में संशोधन करने की मांग
(6 ) संविधान के मुताबिक ग्रामसभा के निर्णय का पालन करवाने की मांग
(7 ) छत्तीसगढ़ जनसुरक्षा अधिनियम 2005 को खारिज़ करने की मांग
(8) अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को बगैर आरक्षण के घोषणा बंद करने और पेसा कानून के तहत पंचायती राज व्यवस्था लागू करने की मांग ।












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