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तमिलनाडु के डिंडीगुल में भीषण हादसा, अस्पताल में आग लगने से 6 की मौत

तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित प्राइवेट अस्पताल में बीती रात भीषण आग लग गई। इस हादसे में 6 लोगों की जान चली गई है। यह हादसा गुरुवार की रात को हुआ, जिससे शहर में कोहराम मच गया। पीड़ितों को एक लिफ्ट में बेहोशी की हालत में पाया गया, जिन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मृत्यु का मुख्य कारण दम घुटना बताया गया। हादसे के बाद दमकल विभाग की टीम ने यहां फंसे 30 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला।

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    इस घटना के बाद पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह आग संभवत: बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी। हादसे के बात इसकी जो तस्वीरें सामने आई हैं उसमे देखा जा सकता है कि इमारत से धुआं और लपटें निकल रही हैं।

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    डिंडीगुल के जिला कलेक्टर एमएन पूंगोडी ने घटना के बारे में बताते हुए कहा, करीब दो घंटे पहले एक निजी अस्पताल में आग लग गई। यहां के मरीजों को बचा लिया गया है और उन्हें पास के सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

    चेन्नई में यह घटना नवंबर में उत्तर प्रदेश में हुई एक और दिल दहला देने वाली घटना के बाद हुई है। वहीं झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आग लगने से 11 नवजात शिशुओं की जान चली गई। आग नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में लगी थी।

    पांच महीने पहले किए गए एक सुरक्षा ऑडिट में पहले से ही गंभीर सुरक्षा उल्लंघनों की बात कही गई थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से इसको लेकर कुछ नहीं किया गया। चंद्र भूषण चौबे और मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में किए गए इस ऑडिट में प्रशासनिक भवन और विभिन्न विभागों सहित चिकित्सा सुविधा के कई हिस्सों में खुली तारों, खुले जंक्शन बॉक्स और अन्य आग के खतरों को उजागर किया गया था।

    ये दो अलग-अलग लेकिन समान रूप से विनाशकारी घटनाएं स्वास्थ्य सुविधाओं में कड़े सुरक्षा उपायों और नियमित ऑडिट की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। चेन्नई और झांसी में हुई जानों की हानि सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी के संभावित परिणामों की एक गंभीर याद दिलाती है।

    अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के लिए यह ज़रूरी है कि वे अपने रोगियों और कर्मचारियों की भलाई को प्राथमिकता दें और ऐसे सुरक्षित वातावरण को सुनिश्चित करें जो ऐसे रोके जा सकने वाले खतरों से मुक्त हो।

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