हिंदी के कट्टर विरोधी करुणानिधि के पोस्टर पर एक नजर

ऊपर पोस्टर में आप देख सकते हैं, जिसमें जनतांत्रिक लोकमत दल (डीएमके) के दयानिधि मरान को भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की गई है। चेन्नई में 24 अप्रैल को मतदान होने हैं, और उससे पहले यहां हर नेता साम दाम दंड भेद अपनाने की जुगत में दिखाई दे रहा है।
करुणानिधि के इस पोस्टर को देख दक्षिण भारत खास तौर से चेन्नई में रह रहे लोगों को हैरानी हुई, क्योंकि डीएमके जैसे दलों की वजह से ही आज चेन्नई में एक भी हिंदी अखबार प्रकाशित नहीं होता है, जबकि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग, आदि समेत कई क्षेत्रों में उत्तर भारतीय प्रोफेशनल यहां काम करते हैं, लेकिन अफसोस कि उन्हें पढ़ने के लिये हिंदी अखबार नहीं मिलता है। बेंगलुरु में मिक्स्ड कल्चर है, जबकि चेन्नई में अधिकांश लोग हर चीज अपनी भाषा में ही पसंद करते हैं।
वैसे हिंदी के प्रति नफरत के कर्णधार कोई और नहीं बल्कि करुणानिधि ही हैं। उन्होंने अपने युवा काल में हिंदी भाषा के विरोध में जर्बस्त विरोध किया और आज जब वोट चाहिये तो उसी हिंदी का सहारा लिया जा रहा है।












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