देखिए, तैयार हो गया देश का सबसे बड़ा 'रावण', इसे पैरों पर खड़ा करने में 150 लोगों को 12 घंटे लगे
चंडीगढ़। देश का सबसे बड़ा 'रावण' इस बार चंडीगढ़ में बना है। यहां धनास क्षेत्र में दशहरे पर रावण के जिस पुतले का दहन होगा, उसकी ऊंचाई 221 फीट है। जबकि, उसके पैर की जूती 40 फीट लंबी है। रावण के सबसे बड़े इस पुतले को 40 कारीगरों ने तैयार किया था। इसे खड़ा करने में 12 घंटे लगे। दो क्रेन, दो जेसीबी और 150 लोगों की मदद से 'रावण' को अपनी जगह खड़ा किया गया। यह रावण कितना विशाल है, इस बात का अंदाजा आप इससे भी लगा सकते हैं कि 24 फीट लंबी तो इसकी मूंछें ही हैं। इसे तैयार होने में 30 लाख रुपए की लागत आई।

इस बार चंडीगढ़ में जलेगा सबसे बड़ा रावण
अंबाला के बराड़ा के रहने वाले तेजिंदर चौहान ने रावण का यह पुतला तैयार कराया। उन्होंने बताया कि इस बार रावण को बनाने में 3 हजार मीटर कपड़ा और ढाई हजार मीटर जूट का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, रावण बनाते रहने में उन्हें 12 एकड़ जमीन भी बेचनी पड़ गई।

तलवार का वजन 2 क्विंटल से भी ज्यादा
इस बार रावण की तलवार को खासतौर पर तैयार किया गया, जिसकी लंबाई 55 फीट है। जबकि, वजन 2 क्विंटल से भी ज्यादा है। रावण का एक बड़ा मुखौटा भी बनाया गया, जो कि फाइबर ग्लास का है। चंडीगढ़ में धनास स्थित ग्राउंड 20 एकड़ से अधिक चौड़ा है, उसी में यह रावण तैयार किया गया।

'लिम्का बुक ऑफ द रिकॉर्डस' आया नाम
बता दें कि, तेजिंदर चौहान का नाम 'लिम्का बुक ऑफ द रिकॉर्डस' में भी आ चुका है। उनका कहना है कि इस दिवाली से पहले जो रावण जलाया जाएगा, वह ईको फ्रेंडली होगा। इस पुतले में लगाए जाने वाले पटाखे शिवाकाशी से कुछ ऐसे मंगवाए गए हैं, जो आवाज तो करेंगे लेकिन प्रदूषण कम फैलाएंगे।

इस बार का खर्च शिव पार्वती सेवा दल ने उठाया
तजिंदर ने यह भी बताया कि उन्होंने 1987 में पहली बार रावण बनवाया था। उसके बाद से हर साल इसे बनाते रहे। रावण को बनाने में जो खर्च आता है, उसके लिए तजिंदर अब तक अपनी साढ़े 12 एकड़ जमीन बेच चुके हैं। इस बार शिव पार्वती सेवा दल की ओर से इसका पूरा खर्च उठाया गया।

इस बार यह भी खास
इस बार रावण में रिमोट के जरिए आग लगाई जाएगी। इसके लिए 20 फंक्शन बनाए गए हैं। दावा है कि इस बार प्रदूषण 80 फीसदी तक कम होगा।












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