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आप का पंजाब में आना कांग्रेस के लिए कर गया संजीवनी का काम?

बता दें कि पंजाब में हाल ही में संपन्न कराए गए चुनाव से विचित्र आंकड़े सामने आए हैं, जो यह दिखाते हैं कि आम आदमी पार्टी के वोटिंग में ठहराव आ रहा है।

चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी ने हाल ही में संपन्न हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को पिछाड़ कर दूसरे नंबर पर रही। हालांकि 2014 के दौरान लोकसभा में संपन्न कराए गए लोकसभा चुनाव में जो आप को लाभ मिला था वो इस चुनाव में नहीं मिल सका। इतना ही नहीं आप ने बिना किसी इरादे के कांग्रेस की खूब मदद की।

20 विधायकों के साथ आम आदमी पार्टी, सत्ताधारी गठबंधन रहे शिरोमणि अकाली दल और भाजपा से 2 सीट ज्यादा पर जीते हैं।यह बात दीगर है कि 2014 में मोदी लहर के दौरान भी 4 लोकसभा सीट जीतने वाली आप ने इस बार विधानसभा चुनाव में दांव आजमाया।

इतना ही नहीं संभावना जताई जा रही थी कि आम आदमी पार्टी पंजाब मे भी दिल्ली जैसा कमाल करेगी। जहां 70 में से 67 सीट आप को मिली थी और बाकी 3 सीटें भाजपा को मिली थीं। कांग्रेस को शून्य से ही संतोष करना पड़ा था। हालांकि यह पंजाब में नहीं हुआ, भाजपा-अकाली दल का गठबंधन और कांग्रेस दोनों, आप के खिलाफ लड़ रह थे। इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 77 सीटें मिली, जबिक 2012 में यह आंकड़ा 46 ही था। हालांकि उनका वोट शेयर इस बार कम हुआ। कांग्रेस को 38.5 फीसदी मत मिले, जो बीते चुनाव से 2.5 फीसदी कम थे।

अशोका विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को मानना है कि कांग्रेस अपना वोट बैंक वापस पाने में सफल रही लेकिन आप अपना आधार नहीं बढ़ा सकी। उसे सिर्फ अकाली-भाजपा के खिलाफ एंटी इंकंबेंसी वाले वोट मिले। त्रिकोणीय लड़ाई से कांग्रेस को बड़ा फायदा हुआ।

सामाजिक राजनीतिक परिदृश्य के हिसाब से पंजाब तीन हिस्सों में बंटा है। इसमें 117 विधानसभा सीट और 13 लोकसभा क्षेत्र है। 2014 के लोकसभा चुनाव में आप 33 विधानसभा सीटों पर अकेले लड़ी थी और 4 लोकसभा सीटें जीती थीं और कांग्रेस को सिर्फ 3 सीटें मिली थीं।

हम अपना विस्तार करने से चूक गए

हम अपना विस्तार करने से चूक गए

चुनाव जीतने वाले आप विधायक ने कहा कि हम अपने मजबूत इलाकों में खुद का विस्तार करने से चूक गए। अगर हमने सिर्फ मालवा क्षेत्र पर फोकस किया होता तो आज परिणाम अलग होते। 2014 में आप को मालवा क्षेत्र से 27 फीसदी वोट मिल था। इतना ही नहीं मालवा, पंजाब का वो इलाका है जहां से 117 सीटों वाली विधानसभा में 69 विधायक सदन में जाते हैं।

मालवा में आप ने की थी मेहनत

मालवा में आप ने की थी मेहनत

आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मालवा क्षेत्र में खासा चुनावी कैंपेन किया था लेकिन पार्टी के हिस्से में सिर्फ 2 सीटें ही आईं। इतना ही दोआबा क्षेत्र में ही जहां 23 सीटें हैं, वहां पार्टी की वोट शेयर 0.5 फीसदी कम हुआ और सिर्फ 2 सीटें इनके खाते में आई। माझा क्षेत्र में आप को पार्टी का वोट शेयर 12.3 फीसदी से बढ़कर 13.7 फीसदी हुआ हालांकि इससे कोई लाभ नहीं हुआ।

कांग्रेस को मालवा में मिले 4 फीसदी कम वोट

कांग्रेस को मालवा में मिले 4 फीसदी कम वोट

बता दें कि इस चुनाव में कांग्रेस को मालवा इलाके में 4 फीसदी वोट कम मिले हैं लेकिन 9 सीटें बढ़ गई हैं। इसकी खास वजह रही है, आप की चुनाव में एंट्री। मालवा क्षेत्र परंपरागत रूप से सत्ता की चाभी रहा है। आप का फैसला था कि मालवा पर उनका फोकस रहा लेकिन दोआबा और माझा में आप कमजोर हो गई।

आप का परफॉर्मेंस अकाली-भाजपा से बेहतर

आप का परफॉर्मेंस अकाली-भाजपा से बेहतर

आप का परफॉर्मेंस भाजपा और अकाली के हार से ज्यादा बड़ा रहा, जिसका सीधा मतलब है कि आप ने दूसरे दलों का आधार हासिल करने को सफलता प्राप्त की।

ये भी पढ़ें: पंजाब चुनाव: 10 ऐसी सीटें, जहां हुआ सांस रोक देने वाला मुकाबला

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