विश्व बैंक का दावा- लॉकडाउन के चलते भारत में 4 करोड़ प्रवासियों की आजीविका पर संकट
नई दिल्ली। विश्व बैंक के अनुसार, भारत में कोरोनो वायरस के प्रसार को रोकने के लिए 24 मार्च को लागू किए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते लगभग 4 करोड़ आंतरिक प्रवासियों को प्रभावित किया है। बैंक ने बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि लगभग 50 से 60 हजार लोग शहरी इलाकों से गांवों में वापस चले गए हैं। वहीं भारत में लॉकडाउन ने देश के लगभग 40 मिलियन आंतरिक प्रवासियों के एक बड़े हिस्से की आजीविका को प्रभावित किया है।
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लॉकडाउन में प्रवासियों की मुश्किल बढ़ाई
'कोविड -19 क्राइसिस थ्रू ए माइग्रेशन लेंस' शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार- आंतरिक प्रवास की तीव्रता अंतरराष्ट्रीय प्रवास की तुलना में लगभग ढाई गुना है। लॉकडाउन की वजह से रोजगार की हानि तो हुई ही है साथ ही सामाजिक गड़बड़ी ने भारत और लैटिन अमरीका के कई देशों में आंतरिक प्रवासियों के लिए बड़े पैमाने पर वापसी की एक अराजक और दर्दनाक प्रक्रिया के लिए भी प्रेरित किया है।

सरकारों को उठाने होंगे बड़े कदम
सरकारों को स्वास्थ्य सेवाओं और नकदी हस्तांतरण और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल करके और उन्हें भेदभाव से बचाने के लिए आंतरिक प्रवासियों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने की जरूरत है। विश्व बैंक ने कहा कि कोरोनो वायरस संकट ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय और आंतरिक प्रवासन दोनों को प्रभावित किया है। जैसा कि संकट के शुरुआती चरण देखा गया कि, कई अंतरराष्ट्रीय प्रवासी, विशेष रूप से खाड़ी देशों से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में वापस आ गए, जबतक कि यात्राओं पर रोक ना लगी दी गई।

माइग्रेशन प्रवाह में गिरावट की संभावना
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनो वायरस संकट से पहले, इस क्षेत्र से प्रवासी लोग मजबूत थे। बैंक के अनुसार, माइग्रेशन प्रवाह में गिरावट की संभावना है, लेकिन प्रवासियों के स्टॉक में तुरंत कमी नहीं हो सकती है क्योंकि यात्रा प्रतिबंध और परिवहन सेवाओं में व्यवधान के कारण प्रवासी अपने देश वापस नहीं लौट सके हैं। भारत और पाकिस्तान से मुख्य रूप से कम कुशल प्रवासियों की संख्या 2020 में पहले वर्ष के सापेक्ष बढ़ी, लेकिन 2020 में खाड़ी देशों में महामारी और तेल की कीमत में गिरावट के कारण कमी की उम्मीद है।

इस साल देश में कम पैसा भेज पाएंगे प्रवासी भारतीय
विश्व बैंक ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते इस साल भारत में विदेशों से धन प्रेषण 23 प्रतिशत घटकर 64 अरब डॉलर रह जाने की आशंका है, जो पिछले साल 83 अरब डॉलर था। विश्व बैंक ने बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा, भारत में धन प्रेषण 2020 के दौरान लगभग 23 प्रतिशत घटकर 64 अरब अमेरिकी डॉलर रह जाने का अनुमान है, जबकि 2019 के दौरान यह 83 अरब डॉलर था। रिपोर्ट में कहा गया कि कोविड-19 महामारी और इसके चलते लॉकडाउन के कारण इस साल पूरी दुनिया में धन प्रेषण में 20 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक ये गिरावट हाल के इतिहास में सबसे अधिक है और मोटेतौर पर प्रवासी श्रमिकों के वेतन और रोजगार में कमी के कारण ऐसा होगा।












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