जीडीपी के आंकड़ों के बाद वर्ल्ड बैंक ने भी लगाई मोदी के नोटबंदी के फैसले पर मुहर
नोटबंदी के दौरान लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी, जिसके चलते नोटबंदी पर सवाल भी उठने लगे थे। लेकिन अब वर्ल्ड बैंक और हाल ही में आए जीडीपी के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से की गई नोटबंदी से भले ही सिस्टम से वह कालाधन बाहर न आया हो, जिसकी अपेक्षा की गई थी, लेकिन लंबे समय में यह नोटबंदी फायदे की साबित होने वाली है। अब इस बात पर मुहर लगाई है वर्ल्ड बैंक ने। 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद से ही 50 दिनों तक लोगों को अपने पैसे बदलवाने में दिक्कत का सामना करना पड़ा था। इस दौरान कई लोगों की बैंकों के बाहर लाइन में लगे-लगे ही मौत भी हो गई, जिसके चलते नोटबंदी पर सवाल उठने लगे थे। लेकिन अब वर्ल्ड बैंक और हाल ही में आए जीडीपी के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।

वर्ल्ड बैंक का नोटबंदी को समर्थन
जहां एक ओर बहुत से लोग पीएम द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले को गलत और देश के हित में न होने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्ल्ड बैंक ने नोटबंदी को अपना समर्थन दिया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक वर्ल्ड बैंक की सीईओ क्रिस्टालीना जियोर्जिवा ने कहा है कि भले ही नोटबंदी की वजह से कुछ लोगों को परेशानी हुई है, लेकिन लंबे समय में यह देश के हित में लिया गया फैसला साबित होगा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए बड़े नोटों को बंद करने का जो फैसला लिया है, उसका भारत की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। ये भी पढ़ें- 1 मार्च से बदल चुके हैं बैंकों के नियम, ये है नई व्यवस्था

जीएसटी की भी की तारीफ
नोटबंदी का समर्थन करने के साथ-साथ क्रिस्टालीना ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) की भी तारीफ की और जल्द ही इसके लागू होने की आशा की। क्रिस्टालीना ने नोटबंदी पर कहा है कि इतने बड़े स्तर पर ऐसा फैसला अब तक किसी बड़े देश ने नहीं किया है, लेकिन अब कई दूसरे देश भी भारत के इस फैसले का अध्ययन कर रहे हैं। आपको बता दें कि क्रिस्टालीना दो दिन के भारत दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने मुंबई की लोकल ट्रेन में सफर किया और एशिया की सबसे मलिन बस्ती धारावी को भी देखने गईं।

जीडीपी के आंकड़ों ने भी नोटबंदी को बताया सही
नोटबंदी के बाद कहा जा रहा था कि इससे देश की जीडीपी पर असर पड़ सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नोटबंदी से जीडीपी पर कोई खास असर नहीं पड़ा और केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर 2016) के बीच भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7 फीसदी रही। सीएसओ की तरफ से पहली और दूसरी तिमाही के संशोधित आंकड़े भी जारी किए गए थे। पहले तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.2 फीसदी और दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.4 फीसदी रही है। ये भी पढ़ें- बहकावों में न आएं: नहीं बढ़े हैं एटीएम चार्ज, ये है सही नियम

आईएमएफ पहले ही कर चुका है नोटबंदी की सराहना
नोटबंदी का फैसला लिए जाने के बाद नवंबर 2016 में ही इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) ने नोटबंदी के लिए अपना सकारात्मक रुख दिखाया था। आईएमएफ ने नोटबंदी पर कहा था कि भारत की तरफ से भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए जाने वाले ये सभी कदम फायदेमंद होंगे। आपको बता दें कि नोटबंदी से बड़े नोटों को बंद करने के पीछे का सबसे बड़ा मकसद भ्रष्टाचार पर रोक लगाना था और कालेधन को सिस्टम से बाहर निकालना था।












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