आखिर क्यों महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, जानिए और कितने बढ़ सकते हैं दाम
नई दिल्ली, 22 मार्च। पेट्रोल और डीजल के दाम में लंबे समय के बाद एक बार फिर से आज बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले चार महीनों में पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई थी। तेल कंपनियों ने चार महीने के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में 0.8 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की गई है। नई कीमतें लागू होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल के दाम 96.21 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं जबकि डीजल के दाम 87.47 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। दरअसल जिस तरह से कच्चे तेल के दाम में बढ़ोत्तरी हुई है उसके बाद माना जा रहा है कि पेट्रोल-डीजल के दाम में और भी बढ़ोत्तरी हो सकती है। इससे पहले तेल कंपनियों ने रविवार को डीजल के थोक दाम में 25 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की गई है।

क्यों बढ़े दाम
तेल के दाम में बढ़ोत्तरी की अहम वजह की बात करें तो चार महीने के अंतर के बाद तेल के दाम बढ़ाए गए हैं। इसकी एक बड़ी वजह है कि कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी हुई है। ब्रेंट क्रूड तेल की बात करें तो इसमे 45 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है और यह 118.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। इससे पहले जब तेल के दाम में आखिरी बार बढ़ोत्तरी की गई तो उस वक्त कच्चे तेल के दाम 81.6 डॉलर प्रति बैरल था। यहां ध्यान रखने वाली बात है कि भारत 85 फीसदी कच्चा तेल बाहर से आयात करता है।

4 नवंबर को केंद्र ने घटाई थी एक्साइज ड्यूटी
सामान्य तौर पर पेट्रोल और डीजल के दाम हर रोज संशोधित होते हैं। लेकिन तेल कंपनियों ने 4 नवंबर के बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी नहीं की थी। उस वक्त केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर पांच रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। जिसके बाद पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, पंजाब में विधानसभा चुनाव होने तक पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।

और कितने बढ़ सकते हैं दाम
विशेषज्ञों की मानें तो पेट्रोल और डीजल के दाम में प्रति लीटर .52 रुपए की बढ़ोत्तरी होनी चाहिए अगर कच्चे तेल के दाम में प्रति बैरल एक डॉलर की बढ़ोतरी होती है। लेकिन पेट्रोल और डीजल के दाम में 37 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में पेट्रोल कंपनियां अभी पेट्रोल और डीजल के दाम में 19 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है, जिससे कि मार्केटिंग मार्जिन को बरकरार रखा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को कम कर सकती है, जिससे कि पेट्रोल-डीजल की महंगी कीमत का बोझ आम लोगों पर ना पड़े।












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