सरकार ने क्यों बदला नोट जमा करने का नियम, जानिए पीछे का गणित
पहले दिन सरकार ने पुराने नोटों को लेकर जो नियम बनाए थे, उन्हें आने वाले दिनों में एक नहीं बल्कि कई बार बदल चुकी है।
नई दिल्ली। नोटबंदी में आए दिन सरकार नियम बदलती जा रही है। पहले दिन सरकार ने पुराने नोटों को लेकर जो नियम बनाए थे, उन्हें आने वाले दिनों में एक नहीं बल्कि इतनी बार बदल चुकी है कि अब तो किसी को याद भी नहीं है कि सरकार ने नोटबंदी पर कितनी बार नियम बदले हैं।

नोटबंदी पर सरकार के बोल लगातर बदल रहे हैं। दरअसल, इसके पीछे भी एक गणित है। जब सरकार ने नोटबंदी की घोषणा की थी, तो सरकार का अनुमान था कि करीब 4-5 लाख करोड़ रुपए के पुराने नोट तो जमा ही नहीं होंगे।
अनुमान से अधिक नोट हुए जमा
मौजूदा समय में 500 और 1000 रुपए के कुल 14.2 लाख करोड़ रुपए इस समय चलन में हैं। 13 दिसंबर को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए बयान के मुताबिक 10 दिसंबर 2016 तक 12.4 लाख करोड़ रुपए के पुराने नोट बैंकों में जमा हो चुके हैं।
सरकार द्वारा पुराने नोटों को जमा करने की अंतिम तारीख से 10 दिन पहले तक इतनी अधिक मात्रा में पुराने नोट जमा हो जाने की वजह से सरकार परेशान है कि कहीं 14.2 लाख करोड़ रुपए के पूरे नोट बैंकों में जमा न हो जाएं।
कालेधन का दावा झूठा?
सरकार इस बात से भी घबराई है कि नोटबंदी की घोषणा के समय उन्होंने कहा था कि इस ऐतिहासिक कदम से कालेधन का खात्मा होगा। ऐसे में अगर 14.2 लाख करोड़ रुपए के पूरे नोट जमा हो गए तो कालेधन का दावा झूठा साबित हो जाएगा। ऐसे में हो सकता है कि इसी डर के चलते सरकार लगातार पुराने नोट जमा करने के नियमों में एक के बाद एक बदलाव करती जा रही है।
फिर बनाया नया नियम
सोमवार को ही सरकार ने पुराने नोटों को जमा करने को लेकर एक और नियम बना दिया है। इस नए नियम के अनुसार आप 30 दिसंबर तक सिर्फ एक बार ही 5 हजार से अधिक के पुराने नोट जमा कर सकते हैं। हालांकि, 5 हजार रुपए के कम जितनी बार चाहें उतनी बार जमा कर सकते हैं।
इस नए नियम के अनुसार, अगर आप 5000 रुपए से अधिक के पुराने नोट बैंक में जमा करने जाते हैं तो आपसे पूछा जाएगा कि आखिर अब तक पुराने नोट क्यों जमा नहीं किए।
अन्तिम तारीख से पहले सवाल क्यों?
लोग इस बात से भी परेशान हैं कि आखिर नोटबंदी के तहत पुराने नोटों को बदलने के लिए दी गई अन्तिम तारीख से पहले ही सरकार सवाल क्यों पूछ रही है।
कई गृहणियों का भी कहना है कि जब पीएम मोदी ने नोट बदलने के लिए 30 दिसबंर तक का समय दिया था, तो अब अपनी बात से क्यों पलट रही है सरकार। अब ये क्यों पूछा जा रहा है कि 19 दिसंबर तक पैसे जमा क्यों नहीं किए।
लोग कर रहे थे भीड़ कम होने का इंतजार
बहुत से ऐसे लोग हैं जो बैंकों में भीड़ कम होने का इंतजार कर रहे थे। खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी शुरुआती दिनों में यही कहा था कि लोग परेशान न हों। सभी लोगों को एक साथ बैंक जाने की जरूरत नहीं है, कुछ दिन रुक कर पैसे जमा कराएंगे तो भीड़ कम हो जाएगी।
अब जो लोग पैसे जमा कराने के लिए रुके थे, उन्हें 5 हजार रुपए के पुराने नोट जमा कराने के लिए भी सबूत देना होगा। सरकार जिस तरह से आए दिन नोटबंदी को लेकर नियम बदलती जा रही है, उससे यह तो साफ है कि सरकार को आम जनता पर जरा सा भी भरोसा नहीं है।












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