Farmer Budget 2026: कहां-कहां होती है चंदन-काजू-कोको-अखरोट-बादाम, नारियल की खेती, किसानों को क्या मिलेगा लाभ?
Farmer Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में इन फसलों के विकास और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कई नई योजनाओं और सहायता उपायों की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने बजट 2026 में पारंपरिक अनाज के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी और वृक्ष आधारित फसलों पर विशेष ध्यान दिया है।
भारत के बजट में उच्च-मूल्य फसलों को प्रमुख स्थान मिला है जैसे चंदन (sandalwood), काजू (cashew), कोको (cocoa), नारियल (coconut), अखरोट (walnut) और बादाम (almond)। मोदी सरकार इन फसलों से किसानों की आय बढ़ाने और कृषि निर्यात को मजबूत करने का जरिया बना रही है।

बजट 2026 में इन फसलों को लॉन्ग-टर्म इनकम मॉडल के रूप में देखा गया है। इससे किसानों की आमदनी, रोजगार के अवसर और भारत का कृषि निर्यात-तीनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। जानिए नारियल, चंदन कोको और काजू बादाम की कहां-कहां होती है खेती और इन किसानों को लाभ मिलेगा?
सरकार से तटीय इलाकों में नारियल, चंदन, कोको और काजू किसानों को समर्थन मिलेगा। उत्तर-पूर्वी राज्यों में अगरवुड तथा अखरोट, बादाम, पाइन नट्स जैसी मेवा फसलें भी प्राथमिकता पर होंगी। पुरानी बागानों का जीर्णोद्धार, उच्च घनत्व वाली खेती व ग्रामीण युवाओं को मूल्य संवर्धन से जोड़ने वाली नई योजनाएँ लाई जाएंगी।
नारियल उत्पादन करने वाले किसानों को क्या मिलेगा लाभ
सरकार ने बजट 2026 में नारियल उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रमोशन योजना की घोषणा की है। इसके तहत पुराने और कम उत्पादन देने वाले पेड़ों को हटाकर नई उन्नत किस्में लगाई जाएंगी।
चंदन और ड्राई फ्रूट्स के किसानों को क्या होगा लाभ
इसके अलावा काजू और कोको के लिए अलग राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव है, ताकि देश को आयात पर निर्भरता से बाहर लाया जा सके। अखरोट और बादाम के लिए हाई-डेंसिटी प्लांटेशन, भंडारण और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पहाड़ी किसानों की आय बढ़ेगी।
चंदन की खेती करने वालों को क्या हुआ है ऐलान?
चंदन की खेती को कानूनी सुरक्षा, तकनीकी मार्गदर्शन और बेहतर मार्केटिंग सुविधा देने पर जोर दिया गया है।
चंदन (Sandalwood) की खेती भारत में कहां होती है
कर्नाटक (सबसे अधिक), तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र
सबसे ज्यादा पैदावार: कर्नाटक
उपयोगी किस्म: इंडियन सैंडलवुड (Santalum album)
कीमत: ₹20,000 से ₹30,000 प्रति किलो (हार्टवुड), तेल ₹1 लाख+/लीटर
खेती का समय: 12-15 साल में परिपक्व
कितने किसान: लगभग 20-25 हजार किसान चंदन की खेती करते हैं।
किसानों को क्या मिलेगा लाभ: सरकार की अनुमति व रजिस्ट्रेशन जरूरी, लेकिन अब नियम पहले से आसान हैं।
काजू (Cashew) की खेती
कहां होती है: महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल, गोवा
सबसे ज्यादा पैदावार: महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश
कीमत (कच्चा काजू): ₹110-160 प्रति किलो
प्रोसेस्ड काजू: ₹700-1,200 प्रति किलो
कितने किसान: करीब 10-12 लाख किसान ये खेती करते हैं।
बजट के कारण अब इन्हें मिलेगा खास: निर्यात आधारित फसल, प्रोसेसिंग से ज्यादा मुनाफा
कोको (Cocoa) की खेती
कहां होती है: केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु
सबसे ज्यादा पैदावार: केरल
खेती का तरीका: नारियल/सुपारी के साथ इंटरक्रॉप
कीमत: ₹220-300 प्रति किलो (सूखा बीज)
कितने किसान: लगभग 1.5-2 लाख
बजट में क्यों किया ऐलान: चॉकलेट इंडस्ट्री की मांग तेजी से बढ़ रही है
अखरोट (Walnut) की खेती
कहां होती है: जम्मू-कश्मीर (90%+), हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड
सबसे ज्यादा पैदावार: जम्मू-कश्मीर
कीमत: ₹300-600 प्रति किलो
कितने किसान: करीब 3-4 लाख किसान ये खेती करते हैं।
खास बात: ठंडे इलाके जरूरी, निर्यात की अच्छी संभावना
बादाम (Almond) की खेती
कहां होती है: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश
सबसे ज्यादा पैदावार: जम्मू-कश्मीर
कीमत: ₹700-1,200 प्रति किलो
कितने किसान: लगभग 1-1.5 लाख किसान ये खेती करते हैं।
खास बात: भारत अभी भी आयात पर निर्भर, इसलिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर
नारियल (Coconut) की खेती
कहां होती है: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल
सबसे ज्यादा पैदावार: तमिलनाडु
कीमत: ₹10-20 प्रति नारियल (खेत स्तर)
कितने किसान: 1.3-1.5 करोड़ किसान ये खेती करते हैं
खास बात: तेल, फाइबर, पानी - हर हिस्से से कमाई












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