Budget 2026: एक ऐलान और निवेशकों के करोड़ों स्वाहा! जानें क्या है STT, जिसने बजट के दिन मचा दिया कोहराम
What Is STT: रविवार को बजट भाषण के दौरान शेयर बाजार में एक ऐसा 'यू-टर्न' आया जिसने निवेशकों के होश उड़ा दिए। शुरुआत में जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईटी (IT) सेक्टर के लिए मदद की बात की, तो बाजार झूम उठा। लेकिन यह खुशी कुछ ही मिनटों की मेहमान थी।
जैसे ही वित्त मंत्री ने STT (Securities Transaction Tax) बढ़ाने का ऐलान किया, सेंसेक्स देखते ही देखते 2300 अंक नीचे गिर गया और निफ्टी में भी 500 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई।

क्या हुआ बजट में ऐसा, जिससे मची खलबली?
वित्त मंत्री ने फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) ट्रेडिंग करने वालों को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने ट्रेडिंग पर लगने वाले टैक्स (STT) को भारी भरकम बढ़ा दिया है।
- ऑप्शन (Options): इस पर टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।
- फ्यूचर्स (Futures): इस पर टैक्स 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है (यानी करीब 150% की बढ़ोतरी)।
इसका सीधा मतलब यह है कि अब शेयर बाजार में दांव लगाना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो जाएगा। इस खबर के आते ही शेयर बाजार से जुड़े प्लेटफॉर्म्स जैसे BSE, Angel One और Groww के शेयरों में 10 से 11 फीसदी की गिरावट आ गई।
आसान भाषा में समझें: आखिर क्या है ये STT?
STT का पूरा नाम 'सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स' है। सरल शब्दों में कहें तो जब भी आप शेयर बाजार में शेयर खरीदते या बेचते हैं, या फिर म्यूचुअल फंड और F&O में ट्रेड करते हैं, तो सरकार उस सौदे पर एक छोटा सा हिस्सा टैक्स के रूप में लेती है। आपको यह टैक्स अलग से जमा नहीं करना पड़ता। आप जब भी ट्रेड करते हैं, आपका ब्रोकर खुद ही इसे काटकर सरकार तक पहुंचा देता है। भारत में इसकी शुरुआत 2004 में हुई थी।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
बाजार के जानकारों का मानना है कि सरकार का उद्देश्य छोटे और रिटेल निवेशकों को 'फ्यूचर एंड ऑप्शन' के जोखिम भरे खेल से बचाना है। ज्यादा टैक्स होने की वजह से लोग अंधाधुंध ट्रेडिंग करने से बचेंगे। हालांकि, जेरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर नितिन कामत जैसे दिग्गजों का कहना है कि टैक्स के इस बढ़ते बोझ से बाजार की रौनक कम हो सकती है और ट्रेडर्स का उत्साह ठंडा पड़ सकता है।
ट्रेडर्स क्यों हैं परेशान?
ट्रेडर्स की नाराजगी की दो बड़ी वजहें हैं:
- 1. दोहरी मार: पहले STT इसलिए लाया गया था ताकि दूसरा टैक्स (LTCG) न देना पड़े। लेकिन अब सरकार STT भी वसूल रही है और कैपिटल गेन टैक्स भी बढ़ा रही है।
- 2. मुनाफा कम, टैक्स ज्यादा: ट्रेड चाहे मुनाफे में हो या घाटे में, STT तो देना ही पड़ता है। टैक्स बढ़ने से छोटे मुनाफे पर काम करने वाले ट्रेडर्स की कमाई का बड़ा हिस्सा सरकार की जेब में चला जाएगा।
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