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जानिए क्यों चर्चा में है VedantaFoxconn का सेमीकंडक्टर प्लांट, कैसे लैपटॉप के दाम हो जाएंगे आधे से भी कम

नई दिल्ली, 15 सितंबर। महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार इस समय सेमीकंडक्टर प्लांट के गुजरात जाने की वजह से चौतरफा घिरी हुई है। विपक्ष एकनाथ शिंदे सरकार पर लगातार हमलावर है कि आखिर क्यों और कैसे यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र की बजाए गुजरात चला गया। एनसीपी, कांग्रेस, शिवसेना, मनसे के शीर्ष नेता शिंदे सरकार को घेरने में लगे हैं। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में तो यहां तक आरोप लगा दिया है कि शिंदे ने मुख्यमंत्री बनने के लिए यह डील की थी, जिसके तहत यह प्रोजेक्ट गुजरात चला गया है। यह पूरा विवाद इसलिए भी काफी ज्यादा बड़ा है क्योंकि विपक्ष का आरोप है कि इस साल गुजरात में चुनाव होना है और इसी के चलते इतने बड़े प्रोजेक्ट को गुजरात ट्रांसफर किया गया है जिससे की भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में इसका लाभ हो। ऐसे में यह जानना भी काफी दिलचस्प हो जाता है कि आखिर क्या है कि यह सेमीकंडक्टर प्लांट और क्यों यह प्रोजेक्ट इतना महत्वपूर्ण है कि पूरा विपक्ष महाराष्ट्र सरकार को घेरन में लगा है।

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    क्यों है यह ऐतिहासिक शुरुआत

    क्यों है यह ऐतिहासिक शुरुआत

    लंबे समय से भारत यह कोशिश कर रहा था कि हमारे देश में भी सेमीकंडक्टर बनाए जाएं। इससे ना सिर्फ बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा बल्कि सस्ते सेमीकंडक्टर के चलते देश को किफायती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिल सकेंगे। शाओमी जैसे ब्रांड को भारत में बनाने के लिए सबसे जरूरी था कि भारत में भी सेमीकंडक्टर बनाए जाए। भारत में सेमीकंडक्टर के निर्माण से ही मेक इन इंडिया फोन बनाए जा सकते हैं। सेमीकंडक्टर को बाहर से आयात करके उसे अपना ब्रांड बनाना काफी महंगा था, यही वजह है कि भारत में सेमीकंडक्टर को बनाया जाना बेहद जरूरी थी, ऐसे में इस दिशा में भारत को बड़ी सफलता जरूर मिली है।

    भारत में सेमीकंडक्टर बनने से क्या होगा लाभ

    भारत में सेमीकंडक्टर बनने से क्या होगा लाभ

    बता दें कि सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल टीवी, लैपटॉप, एसी, गाड़ी, मोबाइल फोन आदि में लगाया जाता है। ताइवान में इसकी किल्लत हुई थी, जिसके बाद से इस बात का विकल्प तलाशा जाने लगा कि कैसे इसे सुलझाया जाए। सेमीकंडक्टर की किल्लत के चलते पिछले कुछ समय से गाड़ियों की सप्लाई में भी काफी दिक्कत हो रही थी। अनिल अग्रवाल ने खुद कहा था कि अगर भारत में सेमीकंडक्टर बनता है तो इससे जो लैपटॉप एक लाख रुपए का मिलता है, वह 40 हजार रुपए में मिलने लगेगा। ऐसे में साफ है कि सेमीकंडक्टर के भारत में बनने से कई इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद के दामों में काफी बड़ी गिरावट देखने को मिलेगा। इस प्लांट में डिस्प्ले आदि भी बनाई जाएगी जिससे आने वाले समय में टीवी, मॉनिटर आदि के दामों में भी काफी गिरावट देखने को मिलेगी।

    क्या है सेमीकंडक्टर

    क्या है सेमीकंडक्टर

    सेमीकंडक्टर की बात करें तो इसे हिंदी में अर्धचालक या उपधातु कहते हैं। इसे बनाने में सिलिकॉन और जर्मेनियम का इस्तेमाल किया जाता है। डायोड, ट्रांजिस्टर आदि बनाने में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। चिपसेट की बात करें तो यह एक प्रकार का मदरबोर्ड होता है, इसकी मदद से ही बाकी की चीजें यानि सीपीयू, रैम, हार्डडिस्क काम करता है। इसे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद का ब्रेन कहा जाता है। सेमीकंडक्टर को भारत दूसरे देश से आयात करता है। जिसकी वजह से इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद महंगे हो जाते हैं। ऐसे में भारत में इसके निर्माण से इन उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिलेगी।

    कैसे भारत को मिली बड़ी सफलता

    कैसे भारत को मिली बड़ी सफलता

    भारत ने कई बार यह कोशिश की थी कि हमारे देश में सेमीकंडक्टर का निर्माण किया जाए, लेकिन शुरुआती कोशिश फेल हो गई थी। किसी भी बड़ी कंपनी ने भारत में सेमीकंडक्टर को बनाने में रुचि जाहिर नहीं की थी। विदेशी कंपनियां चाहती थीं कि उन्हें भारत की ओर से कोई छूट दी जाए तभी वह प्लांट लगाने को तैयार होंगी। जिसके बाद भारत की ओर से आखिरकार 10 बिलियन डॉलर का पैकेज घोषित किया गया। भारत ने ऐलान किया कि सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने पर आपको सस्ती बिजली मिलेगी, टैक्स में छूट मिलेगी, सस्ती जमीन मिलेगी। इस तरह के तमाम ऐलान के बाद आखिरकार वेदांता और फॉक्सकॉन ने भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने की घोषणा की।

    कैसे मिला गुजरात को प्रोजेक्ट

    कैसे मिला गुजरात को प्रोजेक्ट

    महाराष्ट्र और गुजरात दोनों राज्यों ने इस प्लांट को अपने राज्य में लगाने के लिए अलग-अलग तरह की छूट देने की घोषणा की थी। लेकिन गुजरात में इस प्रोजेक्ट के जाने की एक बड़ी वजह यह है कि वेदांता चाहता था कि उसे 1000 एकड़ जमीन 99 सालों के लिए लीज पर मिले, जिसे गुजरात सरकार ने स्वीकार कर लिया। साथ ही गुजरात में सेमीकंडक्टर नीति भी है। इसके तहत सक्षम लेबर, बिजली जैसी सुविधा को बेहद कम दर पर देने की नीति है।

    1.54 लाख करोड़ का निवेश

    1.54 लाख करोड़ का निवेश

    वेदांता की बात करें तो यह भारत की कंपनी है। वेदांता ने वियतनाम की कंपनी फॉक्सकॉन के साथ मिलकर भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने का ऐलान किया। वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल ने खुद ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि इतिहास बनने जा रहा है। मुझे इस बात की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि वेदांता-फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर प्लांट गुजरात में लगाया जाएगा। वेदांता इस प्रोजेक्ट में 1.54 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगा, जोकि आत्मनिर्भर भारत और भारत में सिलिकॉन वैली के सपने के सच करेगा।

    क्यों हो रहा राज्यों के बीच विवाद

    क्यों हो रहा राज्यों के बीच विवाद

    वेदांता के चेयरमैन ने अनिल अग्रवाल ने यह स्पष्ट किया है कि इस प्रोजेक्ट से महाराष्ट्र को पूरी तरह से किनारे नहीं किया गया है। गुजरात में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत के बाद इसे महाराष्ट्र में विस्तार दिया जाएगा। ऐसे में दोनों ही राज्य मिलकर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगे। दरअसल 26200 करोड़ रुपए का अनुमानित एसजीएसटी टैक्स इस प्रोजेक्ट के चलते राज्य को मिलेगा। यही वजह है कि महाराष्ट्र में विपक्ष इस प्रोजेक्ट के गुजरात जाने का विरोध कर रहा है। यही नहीं इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से तकरीबन एक लाख लोगों को रोजगार मिलता, जीडीपी बढ़ती।

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