जबरन वसूली के जरिये किया जा रहा डिजिटल ट्रांजेक्शन को मजबूर?
नोटबंदी के दो महीने बाद ही कुछ प्राइवेट बैंकों ने भी ऐसा कदम उठाया है जो नोटबंदी के दिनों की तरह ही लोगों को डिजिटल ट्रांजैक्शन करने की ओर धकेल रहा है।
नई दिल्ली। पहले नोटबंदी और अब कुछ प्राइवेट बैंकों की तरफ से लगाए गए भारी भरकम चार्ज के बाद यह कहना गलत नहीं होगा लोगों को जबरदस्ती डिजिटल ट्रांजैक्शन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जब 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की गई थी, तो कहा गया था कि यह नोटबंदी कालेधन को इकोनॉमी से बाहर निकालने के लिए सरकार की एक पहल है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सरकार का फोकस कालेधन पर कम होने लगा और देश को डिजिटल बनाने की ओर बढ़ गया। नोटबंदी के दो महीने बाद ही कुछ प्राइवेट बैंकों ने भी ऐसा कदम उठाया है जो नोटबंदी के दिनों की तरह ही लोगों को डिजिटल ट्रांजैक्शन करने की ओर धकेल रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक को 2016 में अच्छा-खासा मुनाफा हुआ है। 2016 में एचडीएफसी बैंक का क्यूमुलेटिव प्रॉफिट 13,933.79 करोड़ रुपए रहा है। वहीं दूसरी ओर 2016 में आईसीआईसीआई बैंक का क्यूमुलेटिव प्रॉफिट 8,478.33 करोड़ रुपए रहा। अब यहां पर सवाल ये उठता है कि आखिर बैंकों ने इतने भारी भरकम चार्ज क्यों लगाए हैं, जबकि उन्हें पहले से ही काफी मोटा फायदा हो रहा था? या फिर ऐसा करने के लिए सरकार की तरफ से बैंकों को निर्देश दिया गया है। ये भी पढ़ें- दिल्ली सरकार ने पेश किया 48,000 करोड़ रुपए का बजट, 20 हजार लीटर पानी मिलेगा मुफ्त
बैंकों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने के लिए उन्हें सरकार की तरफ से कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, एक्सिस बैंक के प्रवक्ता के अनुसार बैंक ने अपने उन्हें चार्ज को दोबारा से लागू किया है जो नोटबंदी से पहले थे। लेकिन इन सब के बावजूद यह सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या है, जिसने तीन अलग-अलग निजी बैंकों को एक डिजिटल एजेंडा की तरफ अचानक से ही मोड़ दिया है?












Click it and Unblock the Notifications