'प्रथम दृष्टया किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं पाया गया', अडानी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पैनल ने सौंपी रिपोर्ट
Adani-Hindenburg Row: अडानी-हिंडनबर्ग मामला: छह सदस्यीय पैनल, जिसे 2 मार्च को स्थापित किया गया था, ने कहा कि अभी सेबी की जांच पर सवाल उठाना जल्दबाजी होगी।

SC Panel Report on Adani Row: अडानी-हिंडनबर्ग मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट शुक्रवार को सार्वजनिक की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा नियमों या कानूनों का प्रथम दृष्टया के स्तर पर किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं पाया गया है। फिलहाल सेबी को आगे जांच करने की जरूरत है।
सेबी पर सवाल उठाना जल्दबाजी: सुप्रीम कोर्ट पैनल
सुप्रीम कोर्ट पैनल ने कहा कि अभी इस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी कि अडानी मामले में शेयर की कीमतों में हेरफेर की वजह SEBI की विफलता थी। फिलहाल SEBI की भूमिका पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। बता दें कि अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग ने 24 जनवरी को 2023 को रिपोर्ट जारी कर अडानी ग्रुप की कंपनियों को ओवरवैल्यूड बताया था और शेयर की कीमतों में हेरफेर करने का आरोप लगाया था।
SEBI को अपने प्रशासन को अच्छी तरह से नियमित करना चाहिए
छह सदस्यीय पैनल की जांच बाजार में उतार-चढ़ाव, नियामक ढांचे, निवेशक जागरूकता और अडानी समूह की अन्य कंपनियों के आधार पर की गई है। इसमें कहा गया है कि सेबी को हर पहलू पर जांच करनी चाहिए और इसके अपने प्रशासन को अच्छी तरह से नियमित करना चाहिए।
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी के शेयर स्थिर ही रहे: पैनल
सुप्रीम कोर्ट पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक SEBI ने 13 अलग-अलग तरह के ट्रांजैक्शन की पहचान की है और इसपर अभी और डेटा एकत्रित कर रहा है। नियमों के संदर्भ में फिलहाल तो नियामक की विफलता ढूंढ़ना संभव नहीं होगा। पैनेल ने कहा कि 24 जनवरी 2023 के बाद अडानी समूह के शेयरों में खुदरा निवेश बढ़ गया। इतना ही नहीं हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आन के बाद से अडानी के शेयरों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को 14 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने को कहा
अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को 14 अगस्त तक हिंडनबर्ग द्वारा अडानी समूह की कंपनियों के खिलाफ शेयर की कीमतों में हेराफेरी के लगाए गए आरोपों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इसके लिए सेबी ने कोर्ट से 6 महीने का समय मांगा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने से अधिक का समय देने से इनकार कर दिया।












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