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Silver Rate Shock: चांदी क्यों हो रही मंहगी? खरीदना फायदेमंद या रिस्की? सिल्वर रेट पर जान लें एक्सपर्ट की राय

Silver Rate Hike: नए साल से ठीक पहले चांदी ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने निवेशकों से लेकर आम खरीदार तक सभी का ध्यान खींच लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 80 डॉलर प्रति औंस के पार निकल चुकी है और घरेलू बाजार में भी भाव 2.54 लाख के प्रति किलोग्राम रिकॉर्ड स्तरों के आसपास घूम रहे हैं।

2025 में चांदी ने रिटर्न के मामले में सोने को भी पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर चांदी इतनी महंगी क्यों हो रही है और क्या इस ऊंचाई पर खरीदारी करना समझदारी होगी?

Silver Rate Hike

▶️ रिकॉर्ड पर चांदी, सोना भी पीछे छूटा

वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों में बीते कुछ महीनों में जबरदस्त तेजी आई है। स्पॉट सिल्वर 82 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच चुकी है और सत्र के दौरान 83 डॉलर से ऊपर का स्तर भी छू चुकी है।

साल 2025 में अब तक चांदी करीब 180 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हो चुकी है, जबकि इसी अवधि में सोने की बढ़त लगभग 70-72 प्रतिशत के आसपास रही है। यही वजह है कि इस साल चांदी को सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली एसेट्स में गिना जा रहा है।

▶️ भारत में चांदी के भाव क्यों चढ़े (Why Silver Rate Rising?)

अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी का असर घरेलू बाजार में भी साफ दिख रहा है। देश के कई बड़े शहरों में चांदी 2.50 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच चुकी है। चेन्नई, हैदराबाद और केरल जैसे राज्यों में भाव 2.70 लाख रुपये प्रति किलो के करीब बताए जा रहे हैं, जबकि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगरों में रेट थोड़े कम हैं।

MCX पर भी चांदी 2.54 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर के आसपास कारोबार कर रही है। शहरों के बीच कीमतों का अंतर टैक्स, ट्रांसपोर्ट कॉस्ट और स्थानीय मांग के कारण देखने को मिल रहा है।

▶️ चांदी की तेजी के पीछे क्या हैं असली वजहें (Silver Rate Hike Reason)

मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चांदी की बढ़ती कीमत किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई मजबूत फैक्टर्स के मेल से बनी है। चांदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह सिर्फ कीमती धातु नहीं, बल्कि एक अहम इंडस्ट्रियल मेटल भी है।

सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में पैदा होने वाली कुल चांदी का करीब 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा इंडस्ट्री में खप जाता है। सिल्वर इंस्टीट्यूट के डेटा के अनुसार, 2024 में चांदी की औद्योगिक मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी और यह ट्रेंड 2025 में भी जारी रहा।

🟡 सप्लाई की कमी ने बढ़ाया दबाव

मांग जहां लगातार बढ़ रही है, वहीं सप्लाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पा रही। बीते चार सालों से वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग सप्लाई से ज्यादा बनी हुई है। सिर्फ 2024 में ही बाजार में करीब 148.9 मिलियन औंस की सप्लाई कमी दर्ज की गई थी। पिछले कुछ सालों में यह कमी इतनी बढ़ गई है कि यह लगभग कई महीनों की माइन सप्लाई के बराबर बताई जा रही है। कम होते इन्वेंट्री लेवल ने कीमतों को और सपोर्ट दिया है।

🟡 फेड की नीतियां और डॉलर की कमजोरी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती और आगे भी रेट कम होने की उम्मीदों ने सोने-चांदी जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स को मजबूती दी है। 2025 में फेड ने कई बार रेट घटाए हैं, जिससे डॉलर कमजोर हुआ और कीमती धातुओं में निवेश बढ़ा। कमजोर डॉलर का सीधा फायदा चांदी को मिला।

🟡 FOMO फैक्टर और सुरक्षित निवेश

एक और बड़ा कारण है FOMO यानी डर कि कहीं मौका हाथ से न निकल जाए। जब निवेशकों ने देखा कि सोना काफी महंगा हो चुका है, तो बड़ी संख्या में लोग चांदी की ओर मुड़े। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की तलाश ने भी चांदी की मांग को और हवा दी।

▶️ 2026 में कितनी ऊपर जा सकती है चांदी (Silver Rate prediction 2026)

तकनीकी नजरिए से देखें तो चांदी का ट्रेंड अभी भी मजबूत बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 84 से 87 डॉलर के जोन को पार करती है, तो नई तेजी देखने को मिल सकती है। भारत में MCX पर 2.55 लाख रुपये के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट आने पर भाव 2.60 से 2.75 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकते हैं। हालांकि, गिरावट आने पर 2.40 से 2.35 लाख रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

▶️ क्या अभी चांदी खरीदनी चाहिए (Silver investment india)

यहीं पर निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है। चांदी अपनी तेज उतार-चढ़ाव वाली चाल के लिए जानी जाती है और यह सोने से ज्यादा वोलाटाइल होती है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर सीधे खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है।

लंबी अवधि के निवेशक चांदी को पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के तौर पर देख सकते हैं, लेकिन एकमुश्त निवेश की जगह गिरावट पर चरणबद्ध खरीदारी ज्यादा बेहतर रणनीति मानी जा रही है। फिलहाल इतना तय है कि सप्लाई की कमी और मजबूत मांग के चलते चांदी सुर्खियों में बनी रहेगी और इसके दाम आने वाले समय में भी ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं।

इंडिया टुडे के मुताबिक Enrich Money के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि इस साइकिल में कीमती मेटल्स की जगह पर चांदी का दबदबा है। उन्होंने कहा, "चांदी ने सोने से काफी बेहतर परफॉर्म किया है। यह तेजी इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में तेजी, सेफ हेवन डिमांड और लगातार स्ट्रक्चरल सप्लाई की कमी की वजह से हो रही है।" उन्होंने आगे कहा कि चांदी दशकों में अपने सबसे मजबूत सालाना परफॉर्मेंस में से एक के लिए ट्रैक पर है।

पोनमुडी ने कहा कि COMEX चांदी ने हाल ही में $82.67 के पास नया ऑल टाइम हाई बनाया है और अभी $80 से $81 जोन के आसपास ट्रेड कर रही है। उन्होंने कहा, "बुलिश स्ट्रक्चर बना हुआ है। ऊपर जाने की संभावना अब $84 से $87 जोन की ओर है, जबकि $75 और $72 के बीच मजबूत सपोर्ट है।''

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