आर्थिक सुस्ती के बीच RBI लेगा बड़ा फैसला, ब्याज दरों में और कटौती संभव-रिपोर्ट
RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में रेपो दर में कटौती जारी रख सकता है, क्योंकि आर्थिक वृद्धि में संभावित बाधाएं देखी जा रही हैं और मुद्रास्फीति (महंगाई) केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के करीब पहुंच रही है। यह जानकारी एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की गति धीमी हो सकती है, खासकर अमेरिका में, जहां हाल के आर्थिक आंकड़े मंदी की ओर इशारा कर रहे हैं। अमेरिका में क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI), उपभोग व्यय और रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती दिख रही है, जिससे व्यापार में अस्थिरता का खतरा बढ़ रहा है।

इसके अलावा, नए अमेरिकी प्रशासन के तहत नीति अनिश्चितता और व्यापारिक तनाव से वैश्विक आर्थिक विस्तार प्रभावित हो सकता है, जिससे भारत सहित अन्य देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
RBI की नीतियां और दर-कटौती की संभावना
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए RBI अपनी मौद्रिक नीति को नरम रख सकता है। चूंकि महंगाई दर केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के आसपास बनी हुई है, इसलिए RBI को ब्याज दरों में कटौती करने का मौका मिल सकता है।
बैंकिंग क्षेत्र में बदलाव
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) और वित्त वर्ष 2025 (FY25) की पहली छमाही में बैंकों का ऋण वितरण जमा राशि से अधिक था। हालांकि, अब यह अंतर कम हो गया है, जिससे वित्तीय प्रणाली में तरलता (Liquidity) प्रभावित हो सकती है।
RBI ने इस स्थिति को संभालने के लिए दिसंबर 2024 से बाजार में 5.8 ट्रिलियन रुपये डालने की योजना बनाई है, जिससे वित्त वर्ष 2025 के अंत तक कुल तरलता 1.5 ट्रिलियन रुपये से अधिक हो सकती है।
आने वाले महीनों पर सबकी नजर
अब सभी की निगाहें RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठकों पर टिकी होंगी, क्योंकि उसे आर्थिक विकास को बनाए रखते हुए महंगाई को भी नियंत्रण में रखना होगा। यदि महंगाई दर नियंत्रण में रहती है और विकास दर सुस्त होती है, तो RBI ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है, जिससे होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन सस्ते हो सकते हैं।












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