Petrol Diesel Price: US-Iran शांति वार्ता फेल, फ्यूल प्राइस पर क्या होगा असर?चेक करें पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट
Petrol Diesel Price Today: US-Iran के बीच शांति वार्ता फेल हो गई है। वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने आज के लिए पेट्रोल और डीजल के ताजा भाव जारी कर दिए हैं। राहत की बात यह है कि देश के सबसे बड़े महानगरों में से एक, मुंबई में डीजल की कीमतें पिछले 12 महीनों से ₹90.03 प्रति लीटर पर टिकी हुई हैं, जिसमें 12 अप्रैल 2025 के बाद से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
हालांकि, देश के अन्य हिस्सों जैसे चेन्नई, लखनऊ और जयपुर में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है, वहीं नोएडा और पटना जैसे शहरों में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। आज पेट्रोल और डीजल के दाम स्थानीय करों और वैट (VAT) के आधार पर अलग-अलग राज्यों में भिन्न हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब और मासिक बजट पर पड़ता है।

प्रमुख शहरों में आज की कीमतें और बदलाव
नीचे दी गई टेबल में आप देख सकते हैं कि आज आपके शहर में ईंधन की स्थिति क्या है:
डीजल और पेट्रोल के ताज़ा दाम (प्रति लीटर)
| शहर | डीजल (₹) | बदलाव | पेट्रोल (₹) | बदलाव | |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | मुंबई | 90.03 | 0 | 103.54 | 0 |
| 2 | नई दिल्ली | 87.67 | 0 | 94.77 | 0 |
| 3 | चेन्नई | 92.61 | 0.22 | 101.06 | 0.26 |
| 4 | कोलकाता | 92.02 | 0 | 105.45 | 0 |
| 5 | बेंगलुरु | 90.99 | 0 | 102.92 | 0 |
| 6 | हैदराबाद | 95.7 | 0 | 107.5 | 0 |
| 7 | लखनऊ | 87.98 | 0.22 | 94.84 | 0 |
| 8 | पटना | 91.78 | -0.54 | 105.54 | -1 |
| 9 | नोएडा | 87.81 | -0.38 | 94.74 | 0 |
शांति वार्ताओं की विफलता और तेल बाजार का संकट
US ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता का कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका है। 21 घंटे तक चली यह बातचीत फेल हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भी शांति वार्ताएं विफल होती हैं, तो उसका सीधा और नकारात्मक असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ता है। इसके कुछ गंभीर कारण यहां हम बता रहे हैं-
कच्चे तेल में अचानक उछाल: युद्ध या तनाव की स्थिति में निवेशक 'सप्लाई रिस्क' को देखते हुए भारी खरीदारी करते हैं, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं।
महंगी होती सप्लाई चेन: तनावग्रस्त क्षेत्रों (जैसे मध्य-पूर्व) से तेल लाना जोखिम भरा होता है। इससे समुद्री माल ढुलाई और बीमा का खर्च बढ़ जाता है, जो ईंधन को महंगा बनाता है।
रुपये पर दबाव: वैश्विक अस्थिरता के दौरान डॉलर मजबूत होता है और भारतीय रुपया कमजोर। भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे घरेलू स्तर पर कीमतें बढ़ती हैं।
महंगाई का बढ़ता चक्र: डीजल की कीमतों में वृद्धि सीधे तौर पर ट्रांसपोर्टेशन लागत को बढ़ा देती है। इसका परिणाम यह होता है कि फल, सब्जी और अनाज जैसी दैनिक जरूरतों की चीजें आम जनता के लिए महंगी हो जाती हैं।
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With AI Inputs












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