Mutual Fund: स्मॉल कैप का वो फंड जिसने दिए चौंकाने वाले रिटर्न, लोग हुए मालामाल
Mutual Fund Quant Small Cap: हर कोई म्युचुअल फंड में निवेश करके अपने भविष्य को सुरक्षित करने के साथ भविष्य की अपनी जरूरतों को पूरा करना चाहता है। एक निश्चित अंतराल पर एक निश्चित राशि को अनुशासित तरह से निवेश करके इस लक्ष्य को हासिल भी किया जा सकता है।
हालांकि कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो बाजार में अधिक जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं और अपने निवेश को तेज रफ्तार से बड़ा करना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए स्मॉल कैप म्युचुअल फंड बेहतर विकल्प है। ऐसे में आज हम बात करें के एक ऐसे स्मॉल कैप म्युचुअल फंड मैनेजर की जिसने पिछले कुछ वर्षों में अपने निवेशकों को रिकॉर्ड रिटर्न दिए हैं।

क्वांट स्मॉल कैप म्युचुअल फंड की बात करें तो इसने पिछले एक वर्ष में 68 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया है। जबकि तीन वर्षों में इस फंड ने औसतन 34.69 फीसदी का रिटर्न दिया है। पांच वर्षों की बात करें तो इसने औसतन 44.35 फीसदी का रिटर्न दिया है।
इस फंड में अगर आप निवेश करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कम से कम 5000 रुपए के निवेश से शुरुआत करनी होगी। यह फंड 21 हजार करोड़ रुपए से अथिक के फंड को मैनेज करता है। इसका एक्सपेंस रेशियो 0.64 फीसदी है और एग्जिट लोड की बात करें तो यह 1 फीसदी है।
किन सेक्टर में है निवेश
क्वांट स्मॉल कैप फंड की ओर से सबसे अधिक निवेश 12.59 फीसदी ऊर्जा के क्षेत्र में किया गया है। जबकि इंडस्ट्रियल में 8.81 फीसदी, धातु में 8.46 फीसदी, फाइनेंशियल में 8.04 फीसदी निवेश किया गया है।
किन कंपनियों में निवेश
क्वांट ने मुख्य रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, ट्रेप्स, अरविंदो फार्मा, कंटेनर कॉर्पोरेशन, संवर्धन मदरसन, एचडीएफसी बैंक, लिंडे इंडिया, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, अडानी पावर, एनएमडीसी लिमिटेड में निवेश किया है।
सेबी कर रहा जांच
सेबी क्वांट म्युचुअल फंड की जांच कर रही है। इसपर फ्रंट रनिंग के आरोप लगे हैं। सेबी की ओर से मुंबई हेडक्वार्टर में छापा मारा है। खुद क्वांट ने इसकी पुष्टि की है कि सेबी की जांच हो रही है और हम उनका सहयोग कर रहे हैं।
क्या है फ्रंट रनिंग
दरअसल फंड मैनेजर ऐसे व्यक्ति होते हैं जिन्हें मार्केट की अच्छी समझ होती है। उदाहरण के तौर पर समझते हैं कि जब किसी फंड मैनेजर के पास यह जानकारी हो कि किसी शेयर में निवेश करने से अच्छा रिटर्न मिल सकता है, लेकिन वह ऐसा निवेशकों के फंड के साथ करने की बजाए अपने फंड के साथ करता है।
वह निवेशकों का पैसा निवेश करके उन्हें बेहतर रिटर्न दिलाने की बजाए खुद का पैसा निवेश करके खुद के लिए रिटर्न बनाए, इसे फ्रंट रनिंग कहते हैं। यानि जो पहले निवेश करता है उसे ज्यादा फायदा होता है क्योंकि वह फ्रंट रनर होता है। नियमों के मुताबिक यह अपराध है, इससे म्युचुअल फंड के निवेशकों को नुकसान होता है।
लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि इस जांच का फंड में निवेश करने वालों पर कोई असर नहीं होगा। इसकी बड़ी वजह है कि म्युचुअल फंड मैनेजर अलग-अलग शेयरों में निवेश करते हैं, लिहाजा फंड का रिटर्न इन कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। लिहाजा आपको अपने म्युचुअल फंड मैनेजर के साथ बाजार पर नजर रखनी चाहिए।












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