इंडिया रिसोर्सेज कॉन्क्लेव 2019: संसाधनों को लेकर हुई विस्तृत चर्चा
नई दिल्ली। सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च ने नीति आयोग के साथ मिलकर 21 जनवरी को दिल्ली में इंडिया रिसोर्सेज कॉन्क्लेव 2019 का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में खनन के क्षेत्र में खासकर कोयला खनन में नीति स्तर पर किस तरह के क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं और आगे क्या किया जाना चाहिए इन तमाम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। कॉन्क्लेव में संसाधनों की उपलब्धता, उनके दोहन और भविष्य के लिए उन्हें बेहतर कैसे काम में लाया जाए इन तमाम बातों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने भी शिरकत की। केंद्रीय मंत्री ने कोयला खनन के क्षेत्र में किस तरह से देश में काम हो रहा है उसकी जानकारी दी। साथ ही कोयला मंत्री ने कहा कि आने वाले वक्त में कोल इंडिया नई ऊंचाइयों को छुएगा। कोयला मंत्री ने कहा कि हम लगातार बाहर से आयात होने वाले कोयले पर अपनी निर्भरता को कम कर रहे हैं लेकिन देश में पहले से कई ऐसे प्लांट लगे हुए हैं जिन में सिर्फ विदेशी कोयले का ही इस्तेमाल हो सकता है। पीयूष गोयल ने कहा कि देश मे कोयले के ट्रांसपोटेशन को लेकर कुछ समस्या है जिसे दूर करने का भी काम होगा।

संसाधनों के इस्तेमाल और पर्यवारण के बीच किस तरह से संतुलन बनाया जा सकता है। इस पर भी इंडिया रिसोर्सेज कॉन्क्लेव 2019 में चर्चा हुई। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने सतत विकास की बात कही लेकिन इसके लिए पर्यावरण के साथ संतुलन बनाने की बात पर जोर दिया। जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने खनन के क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की समस्या पर भी बात रखी और कहा कि हमें इसके लिए ऐसी नीति बनानी होगी जिसमें हम जमीन देने वाले को प्रोजेक्ट में एक तरह से भागीदार बनाए और उसके भविष्य को सुरक्षित करने के उपाय सुनिश्चित करें।

कॉन्क्लेव में मेक इन इंडिया पर भी बात हुई और इसमें किस तरह से और सुधार हो सकता है इस पर विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए। खनन के क्षेत्र में आ रही मुश्किलों, इसके समाधान पर भी बात हुई और साथ ही साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग यानी MSME कैसे खनन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं और इसके लिए क्या किया जा रहा है इसको लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए बेहतर टेक्नोलॉजी की जरूरत पर भी ज़ोर दिया गया। कार्यक्रम में खनन के क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और अपने विचार रखे।












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