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भारत के पास दुनिया का 7वां सबसे बड़ा स्‍वर्ण भंडार? फिर भी RBI क्यों खरीदता रहता है सोना?

Why RBI keep buying gold: भारत में अक्षय तृतीया 2025 के अवसर पर 20 टन सोना (₹18,000 करोड़) बिका! हालांकि ये पर्व पारंपरिक रूप से सोने की खरीदारी के साथ मनाया जाता है इसलिए व्‍यक्तिगत तौर पर लोगों ने दिल खोल कर सोना खरीदा।

लेकिन भारत सोने के भंडार के मामले में विश्व में सातवें स्‍थान पर है। इसके बावजूद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार सोना खरीदता ही जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि जब भारत के पास सोने के इतना बड़ा भंडार है तब भी आरबीआई क्‍यों सोना खरीदता रहता है?

why does RBI keep buying gold

भारत के पास है कितना सोना?

बता दें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) उन संस्थाओं में से एक है जो वित्त वर्ष 2024-25 में 57.5 टन सोने की खरीद करके अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ा रही है। यह खरीद 2017 के बाद से दूसरी सबसे बड़ी वार्षिक खरीद है। पिछले पांच वर्षों में, RBI के स्वर्ण भंडार में 35% की वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 20 में 653 टन से बढ़कर मार्च 2025 तक 880 टन हो गई है।

सोना भंडार रैंकिंग में 7वें स्‍थान पर भारत

इस वृद्धि ने वैश्विक स्वर्ण भंडार रैंकिंग में भारत 2015 में दसवें स्‍थान पर था जो अब सातवें स्थान पर पहुंचा गया है। जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ती भूमिका का प्रमाण है, ये अब 11.35% है, जो कि विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार 2021 में 6.86% से बड़ी वृद्धि है।

क्‍यों केंद्रीय बैंक भंडार को बढ़ाने के लिए हुए प्रेरित?

बता दें वैश्विक अर्थव्यवस्था में सोने की रणनीतिक भूमिका होती है खासतौर पर अनिश्चितता के समय स्थिरता की तलाश करने वाले केंद्रीय बैंकों के बीच। यह बदलाव तब हुआ है जब दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही थी। जिसमें कोविड-19 महामारी का प्रभाव, रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका के नेतृत्व में व्यापार विवाद शामिल हैं।

इन कारणों ने सोने की कीमतों का दुनिया भर में रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों को अपने सोने के भंडार को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है, इस सोने के भंडार को ऐसे ही अशांत समय में बड़े आर्थिक सहारे के रूप में देख जाता हैं।

क्‍यों आरबीआई खरीद रहा सोना?

  • RBI द्वारा सोने के अधिग्रहण में वृद्धि का श्रेय मुख्य रूप से विशेषज्ञ डॉलर के दामों में उतार-चढ़ाव को देते हैं। हाल के वर्षों में डॉलर में उतार-चढ़ाव के कारण, सोना एक अधिक स्थिर विकल्प के रूप में उभरा है। डॉलर की वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में स्थिति के बावजूद, इसके उतार-चढ़ाव और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में अस्थिरता ने पर्याप्त डॉलर भंडार वाले केंद्रीय बैंकों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है।
  • इसने कई लोगों को सोने के साथ अपने पोर्टफोलियो को बदलने के लिए प्रोत्‍साहित किया है। कई लोग सोने के साथ अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित कर रहे हैं।
  • सितंबर 2022 से, RBI ने 214 टन सोना भारत वापस लाया है, जो वैश्विक अस्थिरता के बीच घरेलू स्तर पर सोने के भंडारण की दिशा में एक रणनीतिक मोड़ का संकेत देता है। यह निर्णय न केवल भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाता है, बल्कि एक भरोसेमंद संपत्ति के रूप में सोने की ओर आकर्षित होने का प्रमुख कारण है।
  • विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोने की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी। इसलिए आरबीआई सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार को और बढ़ा रहे हैं ताकि उनके देश की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित हो।
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