अब आयकर विभाग से अश्नीर ग्रोवर ने लिया 'पंगा', स्टार्टअप के निवेशकों की डिटेल मांगने पर भड़के
भारतपे के पूर्व सीईओ अश्नीर ग्रोवर अपने तीखे बयान की वजह से चर्चा में रहते हैं। अब उन्होंने आयकर विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत स्टार्टअप्स के निवेशकों के आईटीआर की डिटेल मांगी गई थी। हालांकि उनको आयकर विभाग ने तगड़ा जवाब दिया है।
कुछ स्टार्टअप्स की आपबीती साझा करते हुए अश्नीर ग्रोवर ने कहा कि उन्हें (कंपनियों को) आयकर नोटिस मिला है, जिसमें शेयरधारकों के बारे में जानकारी देने को कहा गया। इसके अलावा विभाग ने शेयरधारकों के तीन साल का आईटीआर जमा करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने आयकर विभाग के नोटिस की एक प्रति भी साझा की। साथ ही बताया कि नोटिस में विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा 142 (1) के तहत कुछ दस्तावेज मांगे हैं।
अश्नीर ने आगे लिखा कि विभाग ने कारण दिया कि वो शेयरधारकों की साख स्थापित करना (to establish creditworthiness of shareholders) चाहता है। क्यों? कंपनी शेयरहोल्डर्स को लोन थोड़े ना दे रहीं? उल्टा शेयरहोल्डर ने कंपनी में पैसा डाल रखा है। उन्होंने वित्त मंत्रालय से मामले को देखने को कहा।
विभाग ने दिया जवाब
वहीं आईटी विभाग ने ग्रोवर की इस पोस्ट पर जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वित्त अधिनियम 2012 के तहत किसी भी स्टार्टअप के शेयरधारक को धन के स्त्रोत के बारे में बताना होता है। इस मामले में भी विभाग शेयरधारक और निवेशक के लेनदेन की जांच कर रहा, ताकि ये सत्यापित किया जा सके कि निवेश की गई राशि निवेशकों के आईटीआर में दिखाई गई आय के अनुरूप है या नहीं।
फिर किया पलटवार
ग्रोवर यही नहीं रुके। आयकर विभाग के जवाब पर उन्होंने फिर से ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि रिस्पांस पढ़ के समझ आ गया कि कितने लोग इंडिया में आईटीआर नहीं भरते हैं। आईटीआर में दो पार्टी है- टैक्स देने वाला और आईटी विभाग। आईटी विभाग पैन को पंच करके अपने सिस्टम से आईटीआर क्यों नहीं निकाल सकता? दूसरी बात आईटीआर में आपराधिक गतिविधियों से आय का कोई लाइन आइटम नहीं होता।












Click it and Unblock the Notifications