म्युचुअल फंड सही है, लेकिन ये गलती पड़ेगी भारी, SIP से पहले इन 10 बातों का रखें ख्याल
How To Invest in Mutual Fund: सही समय पर नियमित निवेश ना सिर्फ आपके भविष्य को सुरक्षित करता है बल्कि तमाम टैक्स से भी आपकी बचत करता है और वित्तीय मुश्किल के समय आपके लिए काफी मददगार साबित होता है। ऐसे में म्युचुअल फंड में निवेश एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
म्युचुअल फंड में निवेश करने का निर्णय लेना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है, लेकिन सही म्युचुअल फंड का चयन करना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से तमाम तरह के म्युचुअल फंड की जानकारी देने की कोशिश करेंगे, जिसके आधार पर आप अपने सही म्युचुअल फंड को चुन सकते हैं।

अपने निवेश लक्ष्य को स्पष्ट करें
सबसे पहले आप किस मकसद से निवेश कर रहे हैं, इसको लेकर आपकी सोच स्पष्ट होनी चाहिए। अगर आपने एक बार यह तय कर लिया कि निवेश के पीछे आपका मकसद क्या है और किस लक्ष्य को आप हासिल करना चाहते हैं तो सही म्युचुअल फंड चुनने में काफी आसानी होती है।
आपको यह स्पष्ट होना चाहिए कि आप निवेश लघु अवधि के लिए घर खरीदने के लिए बचत, शादी, या किसी यात्रा के लिए के लिए निवेश करना चाहते हैं या फिर दीर्घकालिक अवधि के लिए रिटायरमेंट, बच्चों की शिक्षा या बेहतर रिटर्न के लिए निवेश करना चाहते हैं। यह आप लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न चाहते हैं तो इक्विटी में निवेश अच्छा विकल्प हो सकता है।
जोखिम सहनशीलता का मूल्यांकन करें
म्युचुअल फंड में निवेश जोखिम से जुड़ा होता है। ऐसे में इससे जुड़े जोखिम के बारे में भी आपको जानकारी होनी चाहिए। आप कितना जोखिम वहन करने के लिए तैयार हैं, इसी के आधार पर आपको अपना म्युचुअल फंड चुनना चाहिए।
उच्च जोखिम: अगर आप उच्च रिटर्न के लिए तैयार हैं तो इक्विटी फंड्स चुनें।
मध्यम जोखिम: हाइब्रिड फंड्स (इक्विटी और डेट का मिश्रण)।
कम जोखिम: डेट फंड्स या मनी मार्केट फंड्स।
फंड के प्रकार
फंड का चयन करते समय इसके प्रकार को ध्यान में रखें कि अलग-अलग अवधि के लिए अलग-अलग तरह के फंड होते हैं। लिहाजा आपको इसके बारे में भी स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए और इसी के आधार पर अपने निवेश को चुनना चाहिए।
इक्विटी फंड्स: दीर्घकालिक निवेश के लिए
डेट फंड्स: स्थिर आय और कम जोखिम
हाइब्रिड फंड्स: संतुलित रिटर्न और जोखिम
टैक्स-सेविंग फंड्स (ELSS): कर छूट पाने के लिए
फंड का रिटर्न चेक करें
किसी भी फंड मैनेजर को चुनते समय यह जरूर देखें के बीते वर्षों में इसका प्रदर्शन कैसा रहा है। हालांकि फंड्स चुनने का यह एकमात्र तरीका नहीं होना चाहिए। आपको भूतकाल के रिटर्न के साथ कुछ और बातों का भी खयाल रखना चाहिए। फंड के 5-10 वर्षों के प्रदर्शन, मार्केट अस्थिरता के दौरान इसके प्रबंधन और औसत रिटर्न फंड का कितना रहा है, इसे जरूर देखें।
फंड मैनेजर का अनुभव
फंड मैनेजर की विशेषज्ञता और अनुभव म्युचुअल फंड के प्रदर्शन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। लिहाजा यह जरूरी है कि जिस फंड में आप निवेश कर रहे हैं उसका फंड मैनेजर कैसा है, उनका अनुभव कितना है। अनुभवी फंड मैनेजर को प्राथमिकता दें, उनका ट्रैक रिकॉर्ड और निवेश के नजरिए को जानें।
व्यय अनुपात यानि Expense Ratio, पोर्टफोलियों
म्युचुअल फंड कंपनियां अपनी सेवाओं के लिए एक शुल्क लेती हैं, जिसे व्यय अनुपात कहते हैं। कम व्यय अनुपात वाले फंड्स का चयन करें क्योंकि यह आपके रिटर्न को प्रभावित करता है। फंड का पोर्टफोलियो देखें कि यह किन परिसंपत्तियों में निवेश कर रहा है। निवेश रणनीति जैसे वैल्यू इन्वेस्टिंग या ग्रोथ इन्वेस्टिंग को समझें।
निवेश की अवधि
म्युचुअल फंड का चयन आपकी निवेश अवधि पर निर्भर करता है। अलग-अलग अवधि के लिए निवेश आपके म्युचुअल फंड के चयन को प्रभावित करता है। ऐसे में इन बातों का खयाल रखें।
लघु अवधि (1-3 वर्ष): लिक्विड फंड्स या शॉर्ट-टर्म डेट फंड्स।
मध्यम अवधि (3-5 वर्ष): बैलेंस्ड फंड्स या हाइब्रिड फंड्स।
दीर्घकालिक (5+ वर्ष): इक्विटी फंड्स।
टैक्स की जानकारी
अलग-अलग म्युचुअल में निवेश पर आपको हासिल होने वाले रिटर्न पर टैक्स भी लगता है। लिहाजा आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आपके रिटर्न पर कितना टैक्स लगेगा।
इक्विटी फंड्स: 1 वर्ष से पहले निकासी पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (15%)
डेट फंड्स: 3 वर्ष से पहले निकासी पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स
टैक्स बचाने के लिए ELSS फंड्स का चयन करें।
नियमित निवेश की आदत डालें
सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश करें। SIP छोटे-छोटे निवेश से बड़ा कोष बनाने का सबसे अच्छा तरीका है। लिहाजा म्युचुअल फंड का चयन करते समय अपने वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम सहनशीलता, और निवेश अवधि को प्राथमिकता दें। हमेशा यह सुनिश्चित करें कि आप फंड के बारे में पूरी जानकारी लें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।












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