हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का इस बार शेयर बाजार पर क्यों नहीं हुआ असर? जानें इसके पीछे की वजहें
Hindenburg report on SEBI , हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में सेबी की चेयरपर्सन माधबी और उनके पति धवल बुच पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 10 अगस्त को प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट के बाद ऐसा माना जा रहा था कि, सोमवार को शेयर बाजार में भारी भूचाल देखने को मिल सकता है। सोमवार को बेंचमार्क स्टॉक सूचकांक लगभग स्थिर रहा और सीमित दायरे में बंद हुआ।
अमेरिकी आधारित शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग ने सेबी प्रमुख पर अडानी द्वारा अपने शेयर की कीमतों को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए गए ऑफशोर फंडों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। इस बार हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का असर शेयर बाजार पर नहीं हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 56.98 अंक गिरकर 79,648.92 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी 20.50 अंक नीचे 24,247 पर बंद होने में कामयाब रहा। बाजार खुलते ही अडानी शेयरों में 2 से ढाई फीसदी की कमजोरी ओपनिंग मिनट में दिखी।

हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट सामने आने के बाद भी शेयर बाजार और निवेशकों पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला। रिपोर्ट के खुलासे के बाद भी मार्केट पर असर ना होने के पीछ कई कारण बताए जा रहे हैं। जिसमें निवेशक ऐसी किसी रिपोर्ट की पहले से ही उम्मीद कर रहे थे। इसके अलावा यह सीधे तौर पर अडानी समूह को टारगेट नहीं कर रही थी। रिपोर्ट ने इस बार सेबी की चेयरमैन माधबी बुच पर आरोप लगाए थे।
पिछली रिपोर्ट का विस्तार था ये खुलासा-
बाजारों से मिली ठंडी प्रतिक्रिया के बारे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि, निवेशकों और संस्थानों को अब पता चल गया है कि यह [हिंडनबर्ग रिपोर्ट] पिछली रिपोर्ट का ही विस्तार है। यह एक नियामक संस्था से जुड़ी व्यक्तिगत आऱोपों की रिपोर्ट है। जिसने हिंडनबर्ग को कारण बताओ नोटिस जारी किया थे। इसीलिए उन्होंने सेबी प्रमुख के खिलाफ लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों को नजरअंदाज कर दिया।
इस बार निशाना अडाणी समूह नहीं था-
हिंडनबर्ग ने जिस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है। वह सीधे तौर पर अडाणी समूह को निशाना बनाते हुए नहीं थी। जिसके चलते मार्केट में मैसेज ये गया कि, फर्म ने अडाणी को नहीं बल्कि सेबी को निशाना बनाया है। जिसके चलते मार्केट पर कोई दवाब देखने को नहीं मिला। इस बार अडानी समूह के शेयरों को हुआ नुकसान पिछली बार की तुलना में "काफी नगण्य" था, जब अडानी पर पहली हिंडनबर्ग रिपोर्ट 18 महीने पहले जारी की गई थी। सोमवार को अडानी समूह के 10 में से आठ शेयर नुकसान में बंद हुए। इनमें अडानी एंटरप्राइजेज (-1.09%); अडानी पोर्ट्स (-2.02%) अडानी विल्मर (-4.14%), एनडीटीवी (-3.08%), और एसीसी (-1.55%)।
हिंडनबर्ग की शॉर्ट सेलिंग इमेज
बता दें कि, हिंडनबर्ग रिसर्च की पहचान एक शॉर्ट सेलिंग फर्म के तौर पर भी है। जो किसी कंपनी को टारगेट करती है औऱ उस लेकर खुलासे करती है। जिसके जरिए वे मुनाफा कमाते हैं। ऐसे में जब इस बार फर्म ने खुलासा किया तो बाजार में इस तरह का माहौल रहा कि, फर्म अपने निजी फायदे के लिए इन खुलासों को कर रही है या फिर भारतीय उद्योग जगत को निशाना बना रही है।
कंपनी की प्रोफाइल के मुताबिक, ये एक एक्टिविस्ट शॉर्ट सेलर है और इसके जरिए अरबों रुपये की कमाई करती है। शॉर्ट सेलिंग एक तरह की ट्रेडिंग या इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजी है। इसमें कोई किसी खास कीमत पर स्टॉक या सिक्योरिटीज खरीदी जाती है और फिर कीमत ज्यादा होने पर उसे बेच देता है, जिससे उसे जोरदार फायदा होता है।
सेबी की ओर से आई त्वरित टिप्पणी का हुआ असर
हिंडनबर्ग के आरोपों पर सेबी चीफ माधबी पुरी बुच ने त्वरित टिप्प्णी करते हुए कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ सेबी ने प्रवर्तन कार्रवाई की है और कारण बताओ नोटिस जारी किया है, अब उसने उसी के जवाब में हमारे चरित्र हनन का प्रयास करने की कोशिश की है। इसके अलावा अडाणी समूह की ओर से जारी किए गए बयान ने भी निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाला है। जिसके चलते अडाणी समूह के शेयर में कोई खास गिरावट देखने को नहीं मिली।












Click it and Unblock the Notifications